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एनएफओ में निवेश सावधानी से करें  Search similar articles
ज्यादातर म्युच्युअल फंड ओपन एंडेड योजनाओं का प्रबंधन करते हैं और ये योजनाएँ वर्ष भर लागू रहती हैं। इसके अलावा वे न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) के साथ नई योजनाएँ भी अपने पोर्टफोलियो में जोड़ते हैं। एनएफओ एट पार मूल्य पर खुलने की वजह से यह निवेशकों का ध्यान तुरंत आकर्षित करता है। यह फंड प्रबंधकों को भी योजनाओं को निवेशकों की बड़ी संख्या तक पहुँचाने के एक फ्लेटफार्म के रूप में काम करता है।

सवाल यह यह उठता है कि क्या एट पार इश्यू निवेशकों के लिए वास्तविक रूप से एक बार का मौका है। क्या निवेशकों को एनएफओ में धन लगाने से पहले मौजूद योजनाओं में निवेश की तुलना में अधिक लाभ मिलता है? एनएफओ एक निवेशक के लिए फंड के विकल्पों को तो बढ़ाते ही हैं, लेकिन साथ ही ये भ्रम भी पैदा करते हैं। एनएफओ में धन लगाने से पहले व्यक्ति को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए।

योजना उद्देश्य जाने : प्रत्येक फंड का निवेश का एक उद्देश्य होता है। अगर फंड कोई ऐसी पेशकश कर रहा है, जो पहले से किसी अन्य फंड ने नहीं की है तो उसमें निवेश के बारे में सोचा जा सकता है। ऐसे एनएफओ से बचना चाहिए, जो पहले से मौजूद फंड के समान निवेश का उद्देश्य रखते हैं। निवेश से पहले ऐसे फंड का ट्रैक रिकॉर्ड भी देखा जा सकता है। फंड के उद्देश्य और निवेश आपके वित्तीय उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए।

उदाहरण के लिए अगर निवेशक की आयु 50 वर्ष है और वह औसत जोखिम के साथ-साथ अपने पोर्टफोलियो इक्विटी को 15 फीसदी जगह देना चाहता है तो अन्य सभी बातें समान रहने पर एक इंडेक्स फंड इंफ्रास्ट्रक्चर या तेल के क्षेत्र में धन लगाने वाले सेक्टर फंड से बेहतर रहेगा।

फंड बगैर ट्रैक रिकॉर्ड के : अगर आप किसी एनएफओ में निवेश का फैसला करते हैं तो यह बात निश्चित है कि उसका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होगा। इसके अलावा आपको यह भी नहीं पता चलेगा कि योजना का पोर्टफोलियो कैसा है। ऐसी स्थिति में ऐसे फंड हॉउस पर भरोसा करना ठीक रहता है, जिसके पास ऐसे फंड के प्रबंधन की क्षमता हो। बड़े नाम वाले फंड प्रबंधक की तुलना में फंड हॉउस पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए। किसी व्यक्ति के मुकाबले संस्थान की साख का अधिक महत्व होता है। इसके अलावा फंड हॉउस के मुनाफा कमाने की स्थिति में फंड प्रबंधन टीम बरकरार रहती है या नहीं यह भी फंड के प्रदर्शन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है।

कुछ नहीं सस्ता जैसा : बहुत बार निवेशक मौजूदा योजनाओं के ऊँची नेट असेट वेल्यू (एनएवी) को देखते हुए नए एनएफओ की 10 रु. प्रति यूनिट की पेशकश से आकर्षित हो जाते हैं। निवेशकों को हमेशा एक बात ध्यान रखना चाहिए कि एनएफओ और मौजूदा योजना दोनों को समान बाजार में निवेश करना होता है। इसके लिए जोखिम भी एक जैसे होते हैं।

कीमत : एनएफओ को एक स्थापित योजना की तुलना में मार्केटिंग के ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं। ये आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं। इसके अलावा डिस्ट्रीब्यूटरों को भी एनएफओ के मामले में अधिक कमीशन दिया जाता है। डिस्ट्रीब्यूटरों के बीच इस बात की होड़ रहती है कि वे ज्यादा से ज्यादा क्लाइंट को एनएफओ में धन लगाने के लिए प्रेरित करें।

निवेशक ऐसे फंड में धन लगा सकते हैं,जो सबक्रिप्शन के लिए दोबारा खुलता है। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि फंड में इंट्री लोड के अलावा एक्जिट लोड भी देना होगा या नहीं। कई बार योजना के सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में लोड कम वसूला जाता है। ऐसा विशेषकर बाजार की अस्थिर चाल के दौरान होता है। अगर आप फंड ऑफ इंड (एफओएफ) में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह जाँच लें कि एफओएफ जिस फंड में निवेश कर रहा है, उसकी लागत क्या है।

एफओएफ में खर्च के तौर पर अधिकतम 0.75 फीसदी ही वसूला जा सकता है, लेकिन जिस फंड में निवेश किया जा रहा है। अगर वह ज्यादा शुल्क वसूलता है तो आपके रिटर्न पर इसका असर पड़ सकता है। यह उस स्थिति में और महत्वपूर्ण हो जाता है जब आप ऐसे फंड में निवेश करते हैं, जिसका लक्ष्य किसी अंतरराष्ट्रीय फंड में निवेश करना है। अन्य देशों में शर्तों और स्थितियों में अंतर हो सकता है और इसी प्रकार शुल्क भी अलग हो सकते हैं।

ढाँचा : फंड का ढाँचा भी महत्वपूर्ण होता है। क्लोज एंडेड फंड आपको एसआईपी में जाने की इजाजत नहीं देंगे। अगर आप घरेलू मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय फंड में निवेश कर रहे हैं तो आपको यह देखना होगा कि फंड किस मुद्रा में निवेश करने जा रहा है। (नईदुनिया)
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