म्युच्युअल फंड इंडस्ट्री की तस्वीर दिन-ब-दिन निवेशकों के पक्ष में बदल रही है। आने वाले कुछ वक्त में घरेलू म्युच्युअल फंड्स का लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक रूप ले लेगा। इसमें कुछ वक्त लग सकता है, लेकिन यह कदम इस इंडस्ट्री के लिए छोटी क्रांति होगी। घरेलू असेट्स मैनेजमेंट कंपनियाँ एकजुट होकर एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म तैयार करने के लिए कदम उठा रही है।
इस मकसद के लिए दि एसोसिएशन ऑफ म्युच्युअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई या एमफी) की बनाई कमेटी के हेड ने इस अहम योजना की जानकारी एक प्रमुख अखबार को दी। नए प्लेटफार्म का स्वरूप बीएसई के स्मॉल और मिडकैप शेयरों के लिए तैयार किए गए इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म इंडोनेक्सट्स की तरह होगा। इससे देश के कोने-कोने तक म्युच्युअल फंड्स की पहुँच सुनिश्चित होगी।
म्युच्युअल फंड्स की पहुँच देश के सभी हिस्सों तक पहुँचाने और इसे निवेशकों के लिए ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए वायरलैस तकनीक के इस्तेमाल की भी योजना तैयार की जा रही है। इस बारे में एमफी के सदस्य और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर जयदीप भट्टाचार्य ने कहा कि लंबे वक्त से म्युच्युअल फंड इंडस्ट्री के कामकाज को निवेशकों के हित में सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। हम इस इंडस्ट्री को ज्यादा आसान, प्रभावी और क्षमतावान बनाना चाहते हैं।
भट्टाचार्य कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म से पूरे देश में निवेशकों तक म्युच्युअल फंड योजनाओं की पहुँच बनेगी। साथ ही इसकी प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि इस सबके बीच लागत में भी कमी आएगी। एमफी इस बारे में देश के बाहर वेंडरों से बातचीत कर चुका है। इसके साथ ही एमफी सॉफ्टवेयर के लिए भी कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है। एमफी को उम्मीद है कि यह प्लेटफार्म अगले 2-3 सालों के भीतर काम करने लगेगा।
एमफी के चेयरमैन एपी कुरियन ने इस बारे में बताया कि हम देश में म्युच्युअल फंड्स की पहुँच आसान और बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म लगाना चाहते हैं। फंड हॉउस मानते हैं कि वितरक के जरिए या सीधे जाकर आवेदन करने की मौजूदा प्रक्रिया निवेशकों के लिए काफी कठिन है। मिसाल के तौर पर चंडीगढ़ का कोई निवेशक टेंपलटन फंड में चेन्नई के रजिस्ट्रार के जरिए निवेश करना चाहता है तो उसका फार्म चेन्नई जाता है। इस फ्लेटफार्म का वास्तविक मकसद कागजी कार्रवाई न्यूनतम करना है।
भट्टाचार्य कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक फ्लेटफार्म के जरिए होने वाला लेन-देन निवेशकों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होगा। इस बाबद बनाई गई कमेटी की योजना आईपीओ आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बनी कमेटी के अध्यक्ष डॉ. पीजे नायक की सिफारिशों का इस्तेमाल करने की है।
वे कहते हैं कि हमें लगता है कि अब म्युच्युअल फंड प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत है। एमफी की योजना एक वायरलेस मोबाइल तकनीक के इस्तेमाल करने की है, ताकि देश के दूर-दराज कोने में बैठा व्यक्ति भी इस प्लेटफार्म का फायदा उठा सके। (नईदुनिया)
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