ब्रोकरएज फर्मों पर गर्मी के मौसम में कारोबार की दृष्टि से सूखा पड़ा हुआ है। जहाँ पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार ने पुनः तेजी के संकेत दिए हैं, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार को फिर से तेजी पर सवार होने में कुछ समय लगेगा।
ट्रेडिंग के दौरान निवेशकों के आने वाले फोन कॉल बंद हो गए हैं। सब तरफ सुस्ती छाई हुई है। पहले के समय में ब्रोकरों के पास आने वाले जबर्दस्त कन्फर्मेशन कॉल के बदले अब ट्रेडिंग समय के दौरान केवल निजी काम या बातें करने वाले कॉल ब्रोकरों के पास आ रहे हैं। ब्रोकरों ने पास न तो नए निवेशक आ रहे हैं और न ही नए निवेश संबंधी पूछताछ ज्यादा हो रही है।
खुदरा निवेशक मैदान से बाहर : रेलिगेयर सिक्युरिटीज के प्रेसिडेंट अमिताभ चक्रवर्ती ने बताया कि वास्तव में बाजार इस वक्त नए निवेशकों को आकर्षित करने में असफल रहा है। ब्रोकिंग कम्युनिटी इस परेशानी को दूर नहीं कर पा रही है। बाजार में वॉल्यूम तेजी से गिरा है। सर्वाधिक कारोबारी समय में भी वॉल्यूम अब सिर्फ 50 प्रश ही बचा है। बाजार के दो बड़े खिलाड़ी- हाई नेटवर्थ इन्वेस्टर (एचएनआई) और खुदरा निवेशक, मैदान से पूरी तरह से बाहर हैं।
एफएंडओ में भी मंदी : मंदी की मार से डेरिवेटिव सेंगमेंट बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। एफएंडओ में ट्रेडिंग वॉल्यूम तेजी से गिरा है। चक्रवर्ती का कहना है कि लीवरेज की पोजिशन को देखते हुए स्थिति तो सामान्य होगी, लेकिन बाजार से वॉल्यूम गायब है। बाजार ने कुछ बिंदु की तेजी हासिल करने के बाद फिर से गिरना शुरू कर दिया है। ऐसे में निवेशक नई खरीदी से दूर हट रहे हैं।
बीटीएसटी हुआ खत्म : अनाग्राम सिक्युरिटीज के डायरेक्टर अजय सराओगी का कहना है कि बाजार में निगेटिव चेन इफेक्ट बना हुआ है। खुदरा निवेशकों पूँजी खो चुके हैं। इस कारण कोई बीटीएसटी (आज खरीदो कल बेचो) कारोबार नहीं हो रहा है। इस स्थिति ने बाजार से जाब्बर को भी बाहर कर दिया है।
अहमदाबाद बीटीएसटी मॉडल के लिए पहचाना जाता है। बाजार के बंद होने के कुछ मिनट पहले ही ट्रेडर्स डिलीवरी ले लेते हैं और उसे अगले कारोबारी सत्र के 10 से 15 मिनट के भीतर ही बेच भी देते थे।
2001 के बाद का लंबा सूखा : सराओगी का मानना है कि 2001 के बाद यह बाजार की दृष्टि से सबसे लंबा सूखा कालखंड है। पहले यह होता था कि करेक्शन के बाद बाजार फिर से तेजी की राह पकड़ लेता था, लेकिन इस बार यह स्थिति नदारद है। कुछ दिनों में लगा था कि बाजार फिर से पटरी पर आ रहा है, लेकिन यह मंदी में ही फँसा रहा।
चक्रवर्ती का कहना है कि कोई भी खिलाड़ी इस बात को पक्के तौर पर नहीं कह पा रहा है कि बाजार निकट भविष्य में सुधर जाएगा। बाजार में प्राइस करेक्शन पूरा हो चुका है, लेकिन समय के हिसाब से (टाइम) करेक्शन अभी भी जारी है। यह जुलाई तक खिंचा सकता है। इस बीच सरकार द्वारा महँगाई को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के कॉर्पोरेट्स पर पड़ने वाले प्रभावों और कंपनियों के पहली तिमाही के परिणाम जैसे संभावित नकारात्मक पहलू भी उभर सकते हैं। (नईदुनिया)
|