देश की प्रमुख मोबाइल फोन सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल द्वारा दक्षिण अफ्रीका की एमटीएन समूह के अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच आज इसके शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया।
बाजार में इस बात को लेकर खासी चिंता है कि भारती इस सौदे के लिए संसाधन कहाँ से लाएगी। दोनों कंपनियों ने इसकी पुष्टि की है कि इस अधिग्रहण के लिए बातचीत चल रही है और यदि सौदा होता है तो यह किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेशों में किया गया सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा। भारती ने एमटीएन में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 37 अरब डॉलर की बोली लगाई है। भारती ने इस सौदे के लिए 12 अरब डॉलर सुरक्षित की नकदी सुरक्षित रखी है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारती के शेयर गिरने की प्रमुख वजह यह है कि एमटीएन में भारती की रुचि से नीलामी की राशि बढ़ सकती है। उनका कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि एमटीएन से भारती को वैश्विक पहचान मिलेगी लेकिन शेयरधारकों के लिए यह ठीक नहीं होगा क्योंकि इसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, चाइना मोबाइल और वोडाफोन कंपनियाँ भी रुचि दर्शा रही है।
एमटीएन का बाजार मूल्य लगभग 36 अरब डॉलर है। मार्च के आखिर तक उसके छह करोड़ 83 लाख ग्राहक थे जो अफ्रीका और मध्य पूर्व के 21 देशों में फैले हैं। भारती की बाजार मूल्य लगभग 42 अरब डॉलर है और उसके छह करोड 20 लाख ग्राहक हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस का बाजार मूल्य लगभग 28 अरब डॉलर का है।
बंबई शेयर बाजार में भारती के शेयरों में 4.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई जबकि जोहानसबर्ग में एमटीएन के शेयर 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ खुले।
भारती के संयुक्त प्रबंध निदेशक अखिल गुप्ता ने कहा कि अभी केवल बातचीत चल रही है। बाजार में केवल अटकलबाजियाँ हैं जिन पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती।
इस बीच जोहानसबर्ग में एमटीएन ग्रुप ने भारती के साथ अधिग्रहण के संबंध में चल रही बातचीत की पुष्टि की। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को जारी एक संदेश में अगली घोषणा होने तक संयम बरतने की सलाह दी है।
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