- मनीष उपाध्याय
रिलायंस पॉवर झटकों से कुछ निवेशक अभी भी बेहाल हैं। कंपनी के इश्यू के बीएसई और एनएसई में लिस्ट होकर ट्रेडिंग शुरू हुए करीब डेढ़ माह का वक्त गुजर जाने के बाद भी अभी तक कुछ निवेशकों को न शेयरों का अलॉटमेंट हुआ है और न ही रिफंड मिला है। एक अनुमान के अनुसार हजारों लोगों का लाखों रुपया इस मामले में अटका हुआ है।
देश के शेयर बाजार में सबसे बड़े आकार के इश्यू का रिकॉर्ड बनाने वाली अनिल धीरुभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनी रिलायंस पॉवर का इश्यू 15 जनवरी को खुला था तथा 19 जनवरी को बंद हुआ था। इसके बाद 11 फरवरी को बीएसई और एनएसई में सूचीबद्ध होकर इसमें ट्रेडिंग शुरू हो गई है, लेकिन निवेशक आज तक अपने ही धन से वंचित हैं।
क्या हो गया : कई निवेशकों की शिकायत है कि इश्यू को लिस्ट हुए करीब डेढ़ माह हो गया, लेकिन उन्हें अभी तक न तो रिफंड मिला है और न ही शेयर अलॉटमेंट की सूचना। एक निवेशक श्री गोपाल खंडेलवाल ने बताया कि हमने परिजन के नाम से कुल 10 एप्लीकेशन लगाई थी।
इनमें से 8 के तो अलॉटमेंट व रिफंड आ गए, लेकिन इनमें से एक सुश्री पूर्णिमा खंडेलवाल के नाम की एप्लीकेशन में 225 में से 16 शेयर का अलॉटमेंट तो मिल गया, लेकिन 18,996 रु. का रिफंड अभी तक नहीं मिला है। श्री खंडेलवाल ने बताया कि उज्जैन के पास नलखेड़ा निवासी उनके मित्र श्री राजेश तिलगोता के पास भी अभी तक न तो रिफंड आया है और न ही अलॉटमेंट। श्री खंडेलवाल ने बताया कि उन्होंने इस बारे में ई-मेल और लिखित शिकायत सेबी और एनएसई को की है।
शिकायत की तो दस्तावेज माँगे : एक अन्य निवेशक श्री विजय जैन का कहना है कि उन्होंने 6 एप्लीकेशन लगाई थी, लेकिन किसी भी एप्लीकेशन का न तो रिफंड मिला है और न ही अलॉटमेंट। श्री जैन का कहना है कि जब इस बात की शिकायत कंपनी रजिस्ट्रार कर्वी स्टॉक ब्रोकिंग लि. के इंदौर दफ्तर में की गई तो एप्लीकेशन फार्म की स्लिप, डिपॉजिटरी पार्टिसिपेट (डीपी) की कॉपी (आमतौर पर मास्टर कहते हैं) आदि दस्तावेज माँग लिए गए।
कंपनी रजिस्ट्रार के दफ्तर में भीड़ बढ़ी : इंदौर में रिलायंस पॉवर इश्यू के कंपनी रजिस्ट्रार कर्वी स्टॉक ब्रोकिंग लि. के दफ्तर में इस तरह के निवेशकों की इन दिनों अच्छी-खासी भीड़ बनी रहती है। सवाल यही उठता है कि जब फार्म भरते वक्त सभी जानकारी दे दी गई तो फिर से जानकारियाँ क्यों माँगी जा रही है?
कंपनी की साइट पर ब्लैंक पेज : श्रीमती संगीता जैन और श्रीमती कनकलता चचानी का कहना है कि कंपनी रजिस्ट्रार के इंदौर दफ्तर को अवगत करा दिए जाने के बाद भी अभी तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। कंपनी रजिस्ट्रार कर्वी की इंटरनेट साइट पर वांछित जानकारी डालने के बाद पेज ब्लैंक हो जाता है।
उपभोक्ता फोरम में जाने की तैयारी : एक खुदरा निवेशक श्री मुरलीधर भंडारी ने आंशिक भुगतान वाले शेयरों के लिए 25 हजार रुपए लगाए थे। उन्हें 17 शेयर आवंटित किए गए। एक माह बाद भी उन्हें बकाया राशि नहीं लौटाई गई है। वे अब उपभोक्ता फोरम में जाने पर विचार कर रहे हैं।
मास्टर माँगने वालों की भीड़ बढ़ी : इंदौर में बड़ी संख्या में निवेशकों के डिमेट खाते स्टेट बैंक ऑफ इंदौर में हैं। बैंक सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से डीपी की मास्टर माँगने वालों की संख्या बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि निवेशक वाकई दिक्कत में हैं।
क्या है नियम : इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी के इंदौर चेप्टर के पूर्व चेयरमैन श्री अजीत जैन के मुताबिक नियमतः शेयर अलॉटमेंट और रिफंड का काम इश्यू लिस्ट होने के पूर्व हो जाना चाहिए। लिस्टिंग के पूर्व कंपनी रजिस्ट्रार स्टॉक एक्सचेंज को लिखित में सूचित करते हैं कि उसने इश्यू के अलॉटमेंट और रिफंड का काम पूरा कर लिया है, अतः इश्यू को लिस्ट कर ट्रेडिंग शुरू करने की इजाजत दी जाए। बीएसई के पूर्व प्रेसीडेंट श्री आनंद राठी ने भी एक कार्यक्रम में इश्यू शेयर अलॉटमेंट और रिफंड के बारे में यही प्रक्रिया बताई थी।
सब्सक्रिप्शन अधिक मिलने से दिक्कतें बढ़ीं : प्रतिदिन 50 से लेकर 100 लोग इस तरह की शिकायतें लेकर आते है। दरअसल, इश्यू बहुत बड़ा होने और उसे सब्सक्रिप्शन भी बहुत अधिक मिलने से व्यवस्थागत दिक्कतें हो सकती हैं। हमारे पास जो भी निवेशक शिकायत लेकर आते हैं, हम उनके डाटा अपने हेड ऑफिस हैदराबाद भेज देते हैं। विलंब का कारण यह है कि एप्लीकेशंस की मात्रा बहुत अधिक है। इसके अलावा कई आवेदनों में पते, पेन नंबर या डिमेट अकाउंट और बैंक डिटेल अधूरे दिए हुए हैं। इस कारण उनकी प्रोसेसिंग में विलंब हो रहा है। -आशुतोष त्रिपाठी, रीजनल हेड, कर्वी स्टॉक ब्रोकिंग लि., इंदौर
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