देश के शेयर बाजारों में जारी भारी उथल-पुथल को देखते हुए सरकार ने निवेशकों को सलाह दी है कि निवेश का निर्णय सोच-समझकर और सचेत रहकर लेने की जरूरत है।
संसद में आज पेश 2007-08 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि बाजार की स्थिरता की दृष्टि से निवेशकों की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इक्विटी में निवेश प्राय आधे-अधूरे विश्लेषण पर आधारित होता है और कम समय में संभावित लाभ प्राप्त करने से प्रेरित होता है। इसे देखते हुए निवेशकों को सोच समझकर निर्णय लेने के साथ ही सचेत रहने की जरूरत है।
वित्तमंत्री द्वारा पेश समीक्षा में कहा गया है कि ज्यादा अच्छा रहेगा कि निवेशक खरीद-फरोख्त करते समय सामान्यतया देखी जाने वाली 'भेड़चाल' और 'हड़बडी' से बचें।
समीक्षा में कहा गया है कि देश के पूँजी बाजार के संभावित विस्तार की पृष्टिभूमि में लाभकर स्थितियाँ और सुव्यवस्था सुनिश्चित करना और भी जरूरी हो जाता है। बाजार में स्थिरता की स्थिति सुनिश्चित करना नीति निर्माताओं, विनियामकों और साथ ही बाजार भागीदारों का भी उत्तरदायित्व है।
नीतिगत पहलों का जिक्र करते हुए समीक्षा में कहा गया है कि इन्हें इस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए कि वे बिना किसी संशस के सही नीतिगत संकेत दें, वहीं विनियामकों को बाजार में कार्य संचालन में किसी अनियमितता को होने से रोकने के लिए पहले से सक्रिय रहने और निगरानी रखने की भी आवश्यकता है।
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