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पते की बात...!
एक निवेशक ने एक-डेढ़ महीने पहले कहा कि बॉयोकान का शेयर खरीदना चाहिए। पूछा क्यों? तो जवाब मिला कि आप सोचो यदि बॉयोकान जैसी फंडामेंटली साउंड कंपनी का इश्यू आज के माहौल में आए तो हजार-डेढ़ हजार रु. प्रति शेयर के भाव पर सौ गुना भरा जाए कि नहीं? बात पते की कही दोस्त।

अब एक बुजुर्ग निवेशक की बात पर भी गौर कीजिए उनका कहना है कि चालीस साल पहले एक बाबूजी ने गन्नों के रस वाले को सुझाव दिया कि रस में बरफ भी डाल दिया करो। डाल देंगे बाबूजी पर पैसे ज्यादा लगेंगे। देंगे जरूर देंगे।

बाबूजी ने जवाब दिया और चालीस साल बाद बाबूजी के पोते ने गन्नों के रस वाले से कहा कि एक गिलास बिना बरफ का रस देना। रस वाला बोला भैयाजी पैसे थोड़े ज्यादा लगेंगे!! क्या गजब बात है ये पहले बरफ डालने के पैसे बढ़ाए और बाद में बरफ न डालने के पैसे भी बढ़ाए। गन्नों के रस वाले ऐसा खेल कर सकते है तो हमारे शेयर बाजार वाले क्यों नहीं कर सकते?

इंडिया बुल्स का भाव इसलिए बढ़ा क्योंकि मोतीलाल का इश्यू महँगे भाव पर खरीदने को निवेशक तैयार बैठे थे और मोतीलाल का भाव बाद में इसलिए बढ़ा क्योंकि एक और गुदड़ी का लाल मोतीलाल से भी ज्यादा महँगे भाव पर इश्यू लाने की तैयारी कर रहा था!!!
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