भागीदारी पत्र जैसे व्युत्पन्न इंस्ट्रमेन्ट को सीमित करने के लिए कानून बनाने की आशंका बंबई शेयर बाजार पर हावी रही जहाँ आरंभिक तेजी के बाद 717.43 अंक की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। आरंभिक तेजी में सेंसेक्स में करीब 500 अंकों की तेजी आई थी।
एफआईआई मार्ग के जरिये हेज फंड की निकासी तथा विदेशी निधियों द्वारा अपनाए गए सतर्कता के रुख के कारण सेंसेक्स 717.43 अंक लुढ़ककर 17998.39 पर बंद हुआ।
आईटी कंपनियों के शेयरों को छोड़कर अधिकांश ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों में हानि दर्ज हुई। एसीसी और रिलायंस इनर्जी ने प्रतिशत के संदर्भ में हानि सहने वाली कंपनियों की अगुवाई की, जो इस बात को दर्शाता है कि सरकार और बाजार नियामक सेबी द्वारा दिए गए आश्वासन 24 घंटे भी कायम नहीं रह पाए।
जिन पाँच कंपनियों के शेयर मूल्य रिकॉर्ड निम्नस्तर को छू गए उनमें एस्सेल प्रोपैक, माइंडट्री कंसल्टिंग, फोर्टिस हेल्थकेयर, सुप्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर, सुंदरम ब्रेक्स शामिल हैं।
जो शेयर अपने रिकॉर्ड उच्चस्तर को छू गए उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, एमआरएफ लिमिटेड, आदित्य बिड़ला, नूवो, एमएमटीसी लिमिटेड, नेयवेली लिग्नाइट, अबन ऑफशोर शिपिंग कॉर्पोरेशन और नेशनल मिनरल शामिल हैं।
इंडिया सीमेन्ट, एडलैब्स फिल्म्स, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशन, रिलायंस पेट्रोलियम, आइडिया सेल्युलर, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, डीएलएफ लिमिटेड और पुर्वान्करा के शेयर भी अब तक की सर्वोच्च ऊँचाई को छू गए।
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