शेयर बाजार के औंधे मुँह गिरने के तुरंत बाद सरकार ने बुधवार को कहा कि वह भागीदारी परिपत्र (पार्टिसिपेटरी नोट) को प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं है तथा उम्मीद व्यक्त की कि दिन चढ़ने के साथ शेयर बाजार में फैली यह घबराहट दूर हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि हम भागीदारी परिपत्र को प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं हैं। हमने भागीदारी परिपत्र को प्रतिबंधित नहीं किया है। हमने सिर्फ भागीदारी परिपत्र प्रबंधन के अंतर्गत आने वाली सारी राशि अथवा कुल व्युत्पन्न स्थिति के जरिये आने वाले धन को नियंत्रित किया है।
कारोबार शुरु होते ही शेयर बाजार औंधे मुँह लुढ़क गया तथा यह लगभग 1700 अंक नीचे जा पहुँचा जिससे शेयर बाजार प्रशासन को 11 बजे तक के लिए शेयर बाजार बंद करने का अस्वाभाविक कदम उठाना पड़ा।
कारोबार के दोबारा शुरू होने के बाद बाजार में फिर से सुधार हुआ तथा वित्तमंत्री की आश्वासन से भरी टिप्पणी से करीब आधा घंटे में आधा हानि कम हो गई।
चिदंबरम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व अभी मंगलवार के मुकाबले आज सुबह नहीं बदले हैं। निगमित क्षेत्र दूसरी तिमाही के कार्य परिणामों की घोषणा कर रहे हैं तथा मुनाफे काफी आकर्षक हैं।
सेबी के प्रस्ताव को निवेशकों और बाजार के हित में बेहतर कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव पूँजी के प्रवाह को संयमित करने के इरादे से प्रेरित हैं। उल्लेखनीय है कि शेयर बाजार के नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ते कदम के बीच बाजार नियामक सेबी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को आफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट (ओडीआई) जारी करने से रोकने का एक प्रस्ताव मंगलवार रात दिया है और इस पर अगले कुछ दिनों में जनता से सार्वजनिक टिप्पणी आमंत्रित की है।
सेबी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और उनके एजेंटों को सहभागिता नोट, इक्विटी आधारित नोट, सीमित रिटर्न जैसे ओडीआई जारी करना या उनका नवीकरण प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया है। अज्ञात इकाइयों से धन प्रवाह पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सेबी ने प्रस्ताव जारी किया है। इसमें उसने विभिन्न प्रस्तावों पर 20 अक्टूबर तक तक टिप्पणी माँगी है।
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