- सीए हिमांशु कंसल
शेयर बाजार में निवेश/ट्रेडिंग जोखिमभरा काम है। शेयर कीमतों में प्रतिदिन होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण कई लोग नुकसान की संभावना से डरते हैं इसलिए निवेश का जोखिम नहीं लेना चाहते। इस बाजार के अनुभवी लोगों की राय में शेयर बाजार से लाभ अर्जित करना कोई गूढ़ रहस्य नहीं है, बल्कि यहाँ वे लोग सफल होते हैं, जो अपनी जोखिम लेने की क्षमता को भली-भाँति जानते हैं तथा उनके अनुसार ही निवेश के निर्णय लेते हैं।
आम निवेशक ऐसा उपाय जानना चाहते हैं, जिसके द्वारा इस जोखिम को कम किया जा सके। रिस्क घटाने के लिए फंड मैनेजर कई स्ट्रेजी का उपयोग करते हैं- जैसे बैलेंस पोर्टफोलियो, एफएंडओ हेजिंग, अधिक केश अलॉकेशन आदि। इन तरीकों में कुछ जटिल होते हैं तो कुछ महँगे। आम निवेशकों के लिए जोखिम घटाने का सरल तरीका सेक्टर-कैप मेट्रिक्स है।
सेक्टर-कैप मेट्रिक्स अँगरेजी में कहावत है 'डोंट कीप ऑल युअर एग्स इन वन बास्केट।' इसका अर्थ है कि अपनी सारी संपत्ति/धनराशि एक जगह इकट्ठा करके न रखें। यह कथन शेयर बाजार में पूर्णतया लागू होता है। पोर्टफोलियो की कंपनियों के उत्पादन, आकार, क्षेत्र, रिस्क प्रोफाइल आदि में भिन्नता होना चाहिए अन्यथा खतरा अधिक होता है।
हालाँकि ऐसा करने से जोखिम शून्य नहीं होता, किंतु उसे बाँटकर कम अवश्य किया जा सकता है। इसके लिए निवेशक सेक्टर कैप मेट्रिक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें पोर्टफोलियो की कंपनियों का क्षेत्र (सेक्टर) तथा बाजार पूँजीकरण (मार्केट कैप) के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है (मेट्रिक्स तालिका देखें)। एक तरफ मार्केट कैप को क्रमबद्ध किया जाता है (हॉरीजेंटल) तथा दूसरी तरफ सेक्टरों की सूची बनाई जाती है (व्हर्टीकल)।
सेक्टर अपनी धनराशि को कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रखते हुए निवेशकों को चाहिए कि वे कई अलग-अलग सेक्टरों के शेयर खरीदें/होल्ड करें। ऐसा करने से पोर्टफोलियो संतुलित रहेगा तथा बाजार में 'सेक्टर रोटेशन' होने की परिस्थिति में रिटर्न से वंचित भी नहीं रहना पड़ेगा। जिन निवेशकों के पास मीडिया, बैंकिंग एवं फायनेंस तथा केपिटल गुड्स आदि कंपनियों के शेयर नहीं थे, उन्हें इस बाजार के 'बुल रन' का कोई फायदा नहीं मिला। इसलिए जरूरी है कि इंवेस्टर सही सेक्टर पहचानें और अपने पोर्टफोलियो में उसे भी शामिल करे।
मार्केट कैप स्वाभाविक है कि बड़ी कंपनी में निवेश कम जोखिम लेते हुए किया जा सकता है। कई लोग टिप्स के आधार पर शेयर खरीद लेते हैं। इस तरह पोर्टफोलियो की गुणवत्ता घटती है और अंत में बहुत सारी छोटी कंपनियों के शेयरों में राशि फँस जाती है। जोखिम क्षमता के अनुसार स्मॉल कैप, मिड कैप तथा लार्ज कैप में लगने वाले धन का कुल निवेश योग्य धन से अनुपात, शेयर खरीदने से पहले निश्चित करना बुद्धिमानी है।
मेट्रिक्स के लाभ इस मेट्रिक्स के निम्नलिखित लाभ हैं :- नकिसी भी एक सेक्टर में ओव्हर-एक्सपोजर से बचा जा सकता है। नपोर्टफोलियो में गैप पहचाने और सुधारे जा सकते हैं। नज्यादा जोखिम वाले शेयरों में निवेश की जाने वाली राशि की अधिकतम सीमा तय करने में मदद मिलती है। ननई ऊँचाइयाँ छूते बाजार के वातावरण में यह मेट्रिक्स केश बढ़ाने का संकेत देता है। नबाजार के उतार-चढ़ाव की तुलना में इस मेट्रिक्स में होने वाले बदलाव से पोर्टफोलियो की संवेदनशीलता (बीटा) की गणना की जा सकती है।
निवेशकों को सलाह है कि वे स्वयं की शेयर होल्डिंग का सेक्टर-कैप मेट्रिक्स में आकलन अवश्य करें। आसान होने के साथ ही इससे समय की भी बचत होती है। नियमित तौर पर इसे बनाने से निवेशक आर्थिक अनुशासन सीख सकते हैं और यही विशिष्टता सफल निवेशकों की पहचान है।
सेक्टर-कैप मेट्रिक्स | क्र. | सेक्टर/कैप | स्मॉल कैप में निवेश (रु.) | मिड कैप में निवेश (रु.) | लार्ज कैप में नवेश (रु.) | कुल योग (रु.) | | 1 | बैंकिंग | गैप | 20000 | 25000 | 45000 | | 2 | सीमेंट | 10000 | गैप | 25000 | 35000 | | 3 | स्टील | 10000 | गैप | 25000 | 35000 | | 4 | केपिटल गुड्स | 15000 | गैप | 25000 | 40000 | | 5 | पावर | 20000 | गैप | गैप | 20000 | | 6 | फर्टिलाइजर | गैप | 50000 | 25000 | 75000 | | 7 | एफएमसीजी | गैप | 25000 | 40000 | 65000 | | 8 | अन्य...1 | 25000 | 20000 | 20000 | 65000 | | 9 | अन्य...2 | 20000 | 20000 | 25000 | 65000 | | 10 | केश | 20000 | 20000 | 15000 | 55000 | | कुल योग (रु.) | | 120000 | 155000 | 225000 | 500000 |
नोट-1 उपरोक्त राशियाँ तथा गैप केवल उदाहरण के तौर पर दिए गए हैं। नोट-2 इस उदाहरण में निवेश योग्य रकम 5 लाख रुपए मानी गई है। नोट-3 अपनी जोखिम क्षमता के अनुरूप, निवेशक इस मेट्रिक्स में फेरबदल कर सकते हैं।
प्रकाशित लेखों के विचार से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। उनमें दी गई सलाह या दिशा-निर्देश भी लेखकों के अपने हैं, अतः उनके लिए वेबदुनिया उत्तरदायी नहीं है। निवेशकों से अनुरोध है कि वे सोच-समझकर निर्णय लें। - प्र.सं.
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