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संदिग्ध शिवसैनिकों ने बाल ठाकरे की छवि कथित तौर पर धूमिल करने के विरोध में आज एक मराठी न्यूज चैनल के मुंबई और पुणे स्थित दफ्तरों पर हमला किया और पत्रकारों सहित चैनल के कर्मचारियों से मारपीट की।

लोहे की छड़ों और गदा से लैस ये हमलावर नारे लगाते हुए मुंबई के उपनगरीय इलाके में स्थित आईबीएन लोकमत के कार्यालय में घुस गए और तोडफोड़ की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बाल ठाकरे के खिलाफ रिपोर्ट देना जारी रहा तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।

चैनल ने इन लोगों द्वारा कर्मचारियों को पीटने, फर्नीचर में तोड़फोड़ करने और खिड़कियों के शीशे और फूलदान पटक देने के चित्र भी दिखाए।

पुलिस उपायुक्त आरएम वाटकर ने बताया कि सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और अन्य दोषी व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। चैनल के कर्मचारियों ने बताया कि हमलावर शिवसेना और उसके प्रमुख बाल ठाकरे के समर्थन में नारे लगा रहे थे ।

पुणे से प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना के कुछ संदिग्ध कार्यकर्ताओं ने सिंहदाद रोड स्थित आईबीएन लोकमत के कार्यालय पर पथराव किया और ओबी वैन नष्ट कर दी।

मुंबई कार्यालय पर हमले के समाचार के बाद वहाँ पुलिस तैनात कर दी गई थी। पुलिस ने पथराव कर रहे आठ हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया।

चव्हाण ने निंदा की : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ त्वरित और समुचित कार्रवाई करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन इसमें हिंसा की कोई जगह नहीं है। लेकिन शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जैसे संगठन जो प्रचार पाने के लिए क्षेत्रीय और भाषायी मुद्दों को उठाते हैं, उनसे आप कैसे कुछ उम्मीद कर सकते हैं।

राज्य के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने इसे कायराना हरकत बताते हुए कहा कि दोषियों का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों को समुचित सुरक्षा प्रदान करने का आश्वासन देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की जाँच में जो संगठन लिप्त पाए जाएँगे सरकार उनसे ही क्षतिपूर्ति हर्जाना दिलवाएगी।

शिवसेना के पूर्व नेता और कांग्रेस के मौजूदा सांसद संजय निरुपम ने घटना की निंदा करते हुए इसे मीडिया की आजादी पर हमला बताया।

सपा विधायक अबू आसिम आजमी ने कहा कि हालात इतने बदतर इसलिए हो गए हैं क्योंकि सरकार ने अतीत में ऐसी हरकतें करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आजमी के हिन्दी में शपथ लेने का विरोध करते हुए मनसे विधायकों ने उनसे विधानसभा में मारपीट की थी।

टेलीविजन चैनलों के संपादकों के संगठन ब्रॉडकास्ट एडीटर्स एसोसिएशन ने हमले की निंदा करते हुए इसकी जाँच की माँग की। बीईए ने अपने एक बयान में कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। यह उन लोगों की हरकत हैं, जो कलम माइक्रोफोन और कैमरा की भूमिका सीमित कर देना चाहते हैं। (भाषा)
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