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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » प्रादेशिक » उप्र: कैबिनेट सचिव ने हथियाई दलित की जमीन (Top official grabs Dalit's land)
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अपने को दलितों की मसीहा बताने वाली मुख्यमंत्री मायावती व सर्वजन समाज की सरकार का दावा करने वाले सर्वोच्च नौकरशाह कैबिनेट सचिव ही जब दलित की कई बीघा जमीन को फर्जी तरीके से हथियाए बैठे हों तो राज्य में दलितों की दशा कअंदाजलगायसकतहै।

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उल्लेखनीय है कि मुख्‍यमंत्री मायावती के सबसे करीबी और राज्य के सबसे ताकतवर नौकरशाह जिन्हें मुख्‍यमंत्री मायावती ने संविधान और नियमों कानूनों को ताक पर रखकर राज्य का कैबिनेट सचिव बनाया, वह ही नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर जमीनों पर अपना साम्राज्य खड़ा करते जा रहे हैं।

एक ओर जहाँ राज्य के प्रमुख नौकरशाह अपर कैबिनेट सचिव एवं वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी विजय शंकर पाण्डेय व दो अन्य राज्य कैडर के आई ए एस अधिकारियों ने अपनी सम्पत्ति का खुलासा कर पारदर्शिता की मिसाल पेश की है।

वहीं कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह का ताजा कारनामा सामने आया है। वे राजधानी के गोमतीनगर इलाके में एक दलित की करोड़ों की भूमि को राजस्व रिकार्डों में फर्जी तरीके से फेरबदल कर 8.5 बीघा जमीन कब्जा करने के प्रयास में हैं। कैबिनेट सचिव द्वारा जमीनों पर अधिकार जमाने में उनका बराबर का हिस्सेदार है उनका भाई मुदित वर्मा जिनका दागदार इतिहास है।

राजधानी के गोमतीनगर में विजयीपुर गाँव है। आजकल यहाँ लखनऊ विकास प्राधिकरण की विभूतिखण्ड के व्यावसायिक योजनाएँ एवं मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। यहाँ ओमैक्स हाइट, पार्श्वनाथ डेवलपर्स, टाटा कन्सल्टेंसीस, डीएलएफ, प्लूमेरिया होम्स, इन्दिरा गाँधी प्रतिष्ठान आदि प्रोजेक्ट्स बनकर तैयार हो रहे हैं।

इसी गाँव विजयीपुर के दलित रामकुमार पासी की करोड़ों की भूमि पर शशांक शेखर सिंह और उसके भाई मुदित वर्मा ने फर्जी अभिलेख तैयार करके 8.5 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इस हेराफेरी में इन दोनों भाईयों का साथ दिया है एक और भू-माफिया विक्रम पुनवानी ने।

स्थानीय गोमतीनगर थाने की पुलिस भी कैबिनेट सचिव के सामने पानी भर रही है। दलित रामकुमार पासी अपनी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए संघर्ष कर रहा है और ऊपर से मुदित वर्मा व उनके दबंग साथियों द्वारा सीने पर रायफल लगाकर धमकाया जा रहा है।

रामकुमार पासी ने कैबिनेट सचिव और उनके भाई द्वारा उनकी जमीन पर कब्जा करने का जब विरोध किया तो उसे जान से मारे जाने की धमकी मिली। रामकुमार पासी ने साहस कर मामले की शिकायत न्यायिक मजिस्टेट के यहाँ धारा-156 (3) के तहत वाद दायर कर एफ आई आर दर्ज कराने का अनुरोध किया।

अदालत ने रामकुमार का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर थानाध्यक्ष गोमतीनगर को आदेशित किया कि वह रामकुमार की शिकायत का मामला पंजीकृत कर मामले की विवेचना सुनिश्चित करें। यह आदेश गत्‌ 27 अगस्त का है किन्तु समाचार लिखे जाने तक गोमतीनगर पुलिस ने मामले को दर्ज नहीं किया।

इसी मुकदमे की पिछली तारीख को इसी अदालत ने 12 नवम्बर को थानाध्यक्ष गोमतीनगर को अदालत में तलब किया है।

दलित रामकुमार पासी की विजयीपुर गाँव स्थित जमीन जोकि उसके पिता वेचू पुत्र बिरजा के नाम राजस्व रिकार्डों में खाता संख्या-234 एवं 249 में लगभग 8.5 बीघा जमीन दर्ज थी उसे मुदित वर्मा और उनके प्रभावशाली भाई शशांक शेखर सिंह ने राजस्व रिकार्डों में हेरफेर कर अपने नाम दर्ज करा ली।

साथ ही दलित रामकुमार पासी की पैतृक जमीन खाता संख्या0-53, जोकि 2.5 बीघा थी उसे इन भाईयों के साथी विक्रम पुनवानी ने रिकार्डों में हेरफेर कर हड़प लिया।

वर्ष 2007 में मुख्‍यमंत्री मायावती की सरकार बनते ही 14 जून 2007 को मुदित वर्मा और कैबिनेट सचिव ने इस जमीन पर अपना दाखिल खारिज भी करवा लिया।

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मजेदार बात यह है कि इस जमीन से संबंधित वाद संख्‍या 405/154 तारीख फैसला 31.08.1974 दाखिल खारिज की पत्रावली ही सरकारी रिकार्डों में नष्ट कर दी गई है। इसी प्रकार वाद संख्‍या 86/533 तारीख फैसला 28 मार्च 1973 दाखिल खारिज विक्रम पुनवानी बनाम वेचू को भी सरकारी रिकार्डों में नष्ट कर दिया गया है।

अपने खिलाफ हो रहे अन्याय की जानकारी दलित रामकुमार मुख्‍यमंत्री मायावती और शासन एवं जिलाप्रशासन के आलाधिकारियों को दी। चूँकि मामला राज्य के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह और उनके भाई मुदित वर्मा का है इस वजह से किसी की हिम्मत नहीं हुई जो उस शिकायती पत्र पर कोई कार्यवाही करता।

रामकुमार पासी का 16 सदस्यों वाला दलित परिवार इस वक्त दोजून के खाने को तरस रहा है लेकिन उस गरीब और दलित को न्याय नहीं मिला।

गोमतीनगर स्थित 8.5 बीघा जमीन जिसपर कैबिनेट सचिव और उनके भाई ने कब्जा कर रखा है, इस जमीन में से लगभग 80 लाख रुपए की मिट्टी का अवैध उत्खनन किया जा चुका है।

जमीन के फर्जी अभिलेख बनाने के साथ-साथ 14 जून 2007 को दर्ज हुए दाखिल खारिज में मुदित वर्मा और उनके भाई शशांक शेखर सिंह की जगह शरदेन्द्र शेखर सिंह पुत्र गया सिंह वर्मा का नाम दर्ज है और इनका पता 2 महात्मा गाँधी मार्ग दर्ज है।

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह की नजर जिस बेशकीमती जमीन पर लग जाती है वह उसे हासिल करके ही रहते हैं और वह जमीन के रिकार्ड में अपनी असली नाम की पहचान और अपना असली पता छ‍िपाने की कोशिश करते हैं।

दलित रामकुमार पासी की जमीन हडपने में जिस तरह उन्होंने अपने नाम व पते का घालमेल किया कुछ उसी तरह की हेराफेरी उन्होंने नोएडा में भू-माफिया मोती गोयल से खरीदी गयी जमीन के मामले में किया था।

दलितों के मसीहा होने का दम भरने वाली मुख्‍यमंत्री मायावती तक हकीकत पहुँच ही नहीं सकती या फिर वह सब कुछ जानते हुए भी अंजान बनी हैं ताकि उनके दलित प्रेम की असलियत कहीं उजागर न हो जाए। -अरविन्द शुक्ला
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