मुंबई पर पिछले साल 26 नवम्बर को आतंकवादी हमले के दौरान पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को पकड़ने वाला सहायक सब इंस्पैक्टर नहीं चाहता था कि उसकी बेटियाँ पुलिस सेवा में शामिल हों।
ओम्बले की तीसरी बेटी वैशाली ने बताया ‘मैं और मेरी तीन बहनों से कोई भी अपनी पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए पुलिस बल में शामिल नहीं होंगी।’ओम्बले ने निहत्थे ही एके 47 से लैस कसाब से दक्षिण मुंबई के गिरगाम चौपाटी में लोहा लेते हुए अपनी कुर्बानी दी जो व्यर्थ नहीं गयी। कसाब को जिन्दा पकड़ लिया गया।
बी एड पूरा कर चुकी वैशाली ने कहा‘मेरे पिता नहीं चाहते थे कि हम (बहनें)पुलिस बल में शामिल हों। उनके पास इसके लिये अपने कारण थे। वह केवल यही चाहते थे कि हम खुश रहें।’उसकी छोटी बहन को अनुकम्पा के आधार पर राज्य सरकार की तरफ से सरकार में क्लर्क की नौकरी दी गयी है।
25 वर्षीय वैशाली ने उस काली रात के घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कहा कि मैं जल्द अध्यापन का काम शुरू करूँगी और अपने परिवार की देखभाल करूँगी। मेरे पिता के कुछ सपने पूरे होने हैं जिन्हें मैं पूरा करूँगी। (भाषा)