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असम में हुए श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों को एक वर्ष हो चुके हैं लेकिन बम धमाकों के पीड़ितों के रिश्तेदार आज भी सदमे से नहीं उबर सके हैं।

गुवाहाटी, बारपेटा रोड और कोकराझार में हुए सिलसिलेवार सात बम धमाकों में मारे गए और घायलों के परिजन उस दिन का वर्णन काफी सहमे हुए से करते हैं।

अपने अस्सी वर्षीय दादा दादी और संबंधी के साथ रहने वाले 14 वर्षीय कौस्तव बोरा का पूछना है कि मेरे माता पिता का क्या दोष था जो अगले दिन होने वाले अपने नए घर के गृहप्रवेश के लिए सामान खरीदने के लिए बाजार गए थे लेकिन बम धमाके का शिकार हो गए।

कौस्ताव के पिता की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और एक सप्ताह तक मौत से जूझने वाली उसकी घायल माँ ने भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में दम तोड़ दिया।

धमाके में अपना पति खो चुकी सृष्टि को जिंदगी की कई कड़वे अनुभवों से गुजरना पड़ा। सृष्टि के ससुराल वालों ने न केवल उसकी शादी करने की कोशिश की बल्कि उसके बेटे को उससे दूर करने और सरकार द्वारा प्राप्त मदद राशि को लेने की भी कोशिश की।

इस बम धमाके में 90 से अधिक लोग मारे गए थे जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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