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भुजबल के हस्ताक्षर से छूटा तस्कर!
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल ने दावा किया है कि उस आदेश पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं, जिसमें नशीली दवाओं के तस्कर की सजा को कथित रूप से निलंबित किया गया है।

बंबई उच्च न्यायालय को सोमवार को बताया गया कि राज्य गृह मंत्रालय में इस सिलसिले में तीन अधिकारी निलंबित किए गए हैं। यह आदेश 2003 में उस समय का है, जब भुजबल कांगेस-राकांपा सरकार में गृहमंत्री थे।

इस आदेश का लाभ अनिल कोठारी नामक व्यक्ति को मिला, जिसे नशीली दवा रखने के आरोप में 2001 में दोषी ठहराया गया था और 12 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

वह फरवरी 2003 से मई 2005 के बीच जेल से बाहर रहा, क्योंकि गृह मंत्रालय के आदेश के तहत उसकी सजा को निलंबित कर दिया गया।

यह मामला उच्च न्यायालय के संज्ञान में पिछले साल उस समय आया, जब कोठारी ने सजा के खिलाफ उसकी अपील को बहाल करने की अर्जी पेश की। उच्च न्यायालय ने 2006 में यह उस समय खारिज कर दी थी क्योंकि नवंबर 2002 में पेरोल पर छूटने के बाद वह जेल वापस नहीं गया।

इस वर्ष अप्रैल में कोठारी के पास दिल्ली में 151 किलोग्राम हशीश बरामद की गई थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल वह तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में है।

जब उसकी अर्जी उच्च न्यायालय के समक्ष पहुँची तो न्यायाधीश यह जानकर हैरत में पड़ गए कि वह दो साल से अधिक समय तक पेरोल पर रहा।
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