बंबई उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा है कि अगर किसी आरोपी को उसके अपराध से संबंधित दस्तावेज उस भाषा में नहीं दिए जाते हैं, जिसे वह समझता हो तो यह उसके अपने बचाव के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
पुलिस ने नागपुर निवासी और याचिकाकर्ता फिरोज खान को 12 जून 2008 को हिरासत में लिया था। नागपुर पुलिस आयुक्त ने महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियाँ निवारण कानून के तहत उसकी हिरासत के आदेश दिए थे। इसमें दो मामले हत्या के प्रयास से जुड़े थे।
बाद में हिरासत संबंधी आदेश गृह विभाग को भेज दिए गए और उसने भी इसकी पुष्टि की। खान ने बंबई उच्च न्यायालय में उस आदेश को चुनौती दी थी।
अदालत में खान के वकील ने दलील दी कि खान को प्राथमिकी, पंचनामा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का हिंदी अनुवाद नहीं दिया गया। वकील ने कहा खान मुस्लिम है और उसकी मातृभाषा उर्दू है। वह मराठी नहीं समझ सकता। |