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मीडिया आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक:रामू
जाने माने निर्माता निर्देशक रामगोपाल वर्मा मानते हैं कि मीडिया आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि आतंकवादी जहाँ व्यक्ति की हत्या कर डालते हैं, वहीं मीडिया अपनी व्याख्या और आक्षेप के जरिए व्यक्ति की सोच पर हमला कर उसकी अंतरात्मा को खत्म कर देता है।

मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए वर्मा ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि अगर निहत्थे लोगों पर हमला करने वालों को आतंकवादी कहा जाता है तो विभिन्न स्तरों पर मीडिया अपने दबाव डालने वाले तरीके और आक्षेप के जरिए यही काम करता है।

उन्होंने लिखा है कि एक आतंकवादी व्यक्ति की सोच पर हमला करता है और उसकी हत्या कर उसके शरीर को खत्म कर देता है। लेकिन मीडिया अपनी व्याख्या के जरिये लोगों के दिमाग पर हमला बोलता है और अपने आक्षेपों के जरिए लोगों की आत्मा को खत्म कर डालता है।

वर्मा ने कहा मैं एक तरह से यह कहना चाहूँगा कि मीडिया आतंकवादियों से कहीं अधिक खतरनाक है क्योंकि वे यह काम मूल्यों की रक्षा के बहाने से करते हैं।

उन्होंने मीडिया पर यह नाराजगी टीवी पर दिखाए गए उन फुटेज तथा उसके बाद शुरू हुई आलोचना के संदर्भ में जाहिर की है, जिनमें वे महाराष्ट्र के निवर्तमान मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख तथा उनके पुत्र रितेश देशमुख के साथ आतंकवादी हमले का शिकार हुए ताज होटल में नजर आ रहे थे।

वर्मा ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि वह ताज होटल जरूर गए थे, लेकिन मुंबई हमलों पर फिल्म बनाने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने लिखा है कि वे अभिनेता रितेश देशमुख को बरसों से जानते हैं और उनके साथ फिल्में की हैं।

वर्मा ने सफाई देते हुए लिखा है कि 30 दिसंबर को मैं अपनी नई फिल्म रण के बारे में चर्चा करने के लिए रितेश से मिला था। रितेश ने बताया कि उसके पिताजी ताज जा रहे हैं और वह भी उनके साथ जाना चाहता है। चूँकि मैं उसके साथ था इसलिए मैं भी चला गया।

वे कहते हैं मुझे हैरत होती है कि जब देश आतंकवाद की ऐसी त्रासदी से जूझ रहा था तब एक फिल्म निर्माता की किसी स्थान पर उपस्थिति जैसे बेतुकी बात को प्रसारित करने में मीडिया इतना वक्त बर्बाद कर सकता है।

उन्होंने कहा मुझे समझ में नहीं आता कि जब इतना कुछ चल रहा है तब यह बात किसी को और कैसे प्रभावित कर सकती है।

वर्मा ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि वह ताज होटल जरूर गए थे, लेकिन मुंबई हमलों पर फिल्म बनाने का उनका कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने लिखा है कि वह अभिनेता रितेश देशमुख को बरसों से जानते हैं और उनके साथ फिल्में की हैं। वर्मा ने सफाई देते हुए लिखा है रविवार 30 दिसंबर को मैं अपनी नई फिल्म रण के बारे में चर्चा करने के लिए रितेश से मिला था। रितेश ने बताया कि उसके पिताजी ताज जा रहे हैं और वह भी उनके साथ जाना चाहता है। चूंकि मैं उसके साथ था इसलिए मैं भी चला गया।

उन्होंने लिखा है कि वह और रितेश दूसरी कार में थे इसलिए विलासराव देशमुख को पता नहीं चला कि वह भी साथ चल रहे हैं। टीवी चैनलों को वह फुटेज मुहैया कराए गए थे, जिन्हें विलासराव की टीम ने शूट किया था। इन दृश्यों को चैनलों पर बार-बार दिखाया गया और सवाल किया गया कि मैं वहाँ क्यों गया, विलासराव मुझे क्यों साथ ले गए। जो कुछ हमने ताज में देखा वह सब टीवी पर पहले भी कई बार दिखाया जा चुका था।

उन्होंने लिखा है अगर मुझे उस पर फिल्म बनानी होती तो क्या मैं देखे हुए घटनाक्रम को देखने जाता। कुछ चैनलों ने यहाँ तक कह दिया कि हमने वहाँ कुछ छेड़छाड़ की। अगर सचमुच ऐसा था तो सुरक्षा अधिकारी हमें रोक सकते थे।

वर्मा के अनुसार विलासराव से मेरा कोई औपचारिक परिचय भी नहीं है। रितेश को सिर्फ इतनी जानकारी थी कि ताज के जिन हिस्सों की जाँच हो चुकी है उन्हें ही हम देख सकते हैं।

रामू के अनुसार जब हम ताज पहुँचे तो वहाँ पुलिस अधिकारियों सरकारी अधिकारियों और होटल के कर्मचारियों सहित 60 से 70 लोग थे। इस भीड़ में मुझे नहीं लगता कि विलासराव का ध्यान मुझ पर गया होगा। मैं उस जगह को देख रहा था, जहाँ सर्वाधिक भयावह घटना हुई थी। ऐसा कौन होगा जिसे उस स्थान को देखने की उत्सुकता नहीं होगी।

वर्मा सवाल करते हैं कि उनके ताज जाने से क्या प्रभावित हो सकता था। अगर उनके कारण सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होता या उनकी वजह से कोई समस्या होती तो उन्हें सुरक्षा अधिकारी रोक सकते थे। अधिकारियों ने उन्हें इसलिए नहीं रोका क्योंकि उन लोगों को वह हिस्से दिखाए गए जहाँ जाँच हो चुकी थी। इन हिस्सों के फुटेज टीवी पर कई बार दिखाई जा चुकी थी।
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