विधायक दल की गुरुवार को घंटों चली मैराथन बैठक के बाद भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का फैसला नहीं हो सका। अब इसकी घोषणा शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी नई दिल्ली में करेंगी।
महाराष्ट्र के पार्टी प्रभारी एके एंटनी और केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रणब मुखर्जी जब गुरुवार को मुंबई पहुँचे तो ऐसा लग रहा था देर शाम या रात तक देशमुख के उत्तराधिकारी का नाम सामने आ जाएगा, लेकिन घंटों की माथापच्ची के बाद भी नतीजा नहीं निकल सका।
इस बीच कभी लहर सुशीलकुमार शिंदे के पक्ष में थी तो कभी ऊँट पृथ्वीराज चव्हाण की ओर बैठता दिखाई दे रहा था। बाद में नारायण राणे भी दौड़ में मजबूत दावेदारी के साथ उभरे।
विखे पाटिल भी कुछ समय के लिए सुर्खियों में बने रहे। हालाँकि बाद में मुकाबला पूरी तरह अशोक चव्हाण और नारायण राणे के बीच सिमटकर रह गया था। सूत्रों के अनुसार अशोक चव्हाण का दावा सबसे प्रबल माना जा रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में घोषित कर दिया जाता है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
अशोक चव्हाण क्यों : अशोक चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 48 वर्षीय चव्हाण में पार्टी खांटी कांग्रेसी के साथ युवा पैरोकार का अक्स भी देखती है। चव्हाण संप्रति राज्य मंत्रिमंडल में संस्कृति मामले, उद्योग और खान मंत्री हैं। वैसे भी मौजूदा सियासी हालात में कांग्रेस को ऐसे चेहरे की तलाश है, जो उसके लिए 'डैमेज कंट्रोलर' का काम करे और चव्हाण इस मामले में पूरी तरह खरे उतरते हैं। वे परिपक्व होने के साथ तेज-तर्रार नेता की छवि भी रखते हैं।
मराठा कार्ड खेलेगी कांग्रेस! : देशमुख को हटाने के बाद यही समझा जा रहा था कि महाराष्ट्र में कांग्रेस पहले की तरह शिंदे पर भरोसा जता सकती है। इसकी दो वजहें थीं एक तो शिंदे पहले भी मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुके हैं, वहीं वे दलित तबके से भी हैं। बाद में देशमुख के जाने की खबरों के बीच सोनिया गाँधी ने दस जनपथ पर शिंदे से पूछा भी था कि क्या वे मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। इस पर शिंदे ने हामी भर दी थी। ऐसे में यही अटकलें थीं कि शिंदे दोबारा महाराष्ट्र के सरताज बन सकते हैं।
...लेकिन बाद में यह बात पुख्ता तौर पर साफ हो चुकी थी कि नौ महीने बाद होने वाले महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी किसी मराठा को ही सरकार की कमान सौंप सकती है।
राणे और पृथ्वीराज क्यों नहीं : अगर अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो यह जानना भी दिलचस्प होगा कि आखिर नारायण राणे और पृथ्वीराज चव्हाण क्यों इस दौड़ में पिछड़ गए।
जहाँ तक राणे का सवाल है तो गुजिश्ता कुछ महीनों में देशमुख पर आरोप लगाने के कारण हाईकमान उनसे खुश नहीं था। हालाँकि पूर्व शिवसैनिक राणे को मुख्यमंत्री पद का लालच देकर ही कांग्रेस में शामिल किया गया था। राणे की नजर भी लंबे समय से 'सुपर सीट' पर गड़ी हुई थीं, लेकिन सूत्रों की मानें तो पार्टी राणे के रुवैये के कारण कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती।
रही बात पृथ्वीराज की तो जानकार बताते हैं शीर्ष नेतृत्व को राज्य से ज्यादा उनकी जरूरत केंद्र में महसूस हो रही है। ऐसे में शिंदे को छोड़ दिया जाए तो अशोक चव्हाण ही सबकी पहली पसंद हो सकते हैं। |