मुंबई हमले के दौरान पकड़ा गया आतंकवादी मोहम्मद अजमल कासब अब कभी एके-47 तो दूर कोई हथियार नहीं उठा पाएगा। जिन हाथों से उसने दर्जनों लोगों की जान ली थी, उन हाथों में उसे गोलियाँ लगी हैं। कासब और उसके एक साथी ने तीन घंटे तक मुंबई के कई इलाकों में फायरिंग करके मौत का खेल खेला था।
पुलिस द्वारा पीछा करने और मुठभेड़ होने पर उसके साथी को अपनी जान गँवाना पड़ी, जबकि कासब के दोनों हाथों में गोलियाँ लगी हैं। पकड़े जाने के बाद कासब ने पुलिस को बताया था कि वह और उसका साथी पुलिस से बचकर किसी सुरक्षित जगह की तलाश में थे, ताकि वह गोलियाँ निकाल सके। दोनों को उम्मीद थी कि यदि वह गोलियाँ निकाल सके तो अपना अभियान जारी रख सकेंगे।
मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर राकेश मारिया का कहना है कि अब तक कासब ने जो सूचनाएँ दी हैं, वह सभी सच साबित हुई हैं। उसी की दी गई सूचना के आधार पर पुलिस ने उस नाव को बरामद किया, जिस पर सवार होकर आतंकवादी मुंबई के समुद्री क्षेत्र में घुसे थे।
कासब ने बताया था कि उस नौका का कैप्टन मृत मिलेगा और वहाँ उन्हें एक सैटेलाइट फोन तथा जीपीएस डिवाइस मिलेगा और ऐसा ही हुआ। पुलिस का कहना है कि अब कासब द्वारा दी गई अन्य जानकारियों की पुष्टि की कोशिश की जा रही है। इसके तहत मुठभेड़ में मारे गए 9 आतंकवादियों की शिनाख्त की पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कासब ने साफ कहा है कि किसी भी आतंकी का पाकिस्तान लौटने का कोई इरादा नहीं था।
यह पूरी तरह आत्मघाती हमला था। घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती होने के बाद ही कासब ने पुलिस से बात करना शुरू कर दी थी। गौरतलब है कि कासब ने पुलिस को बताया है कि गरीबी के कारण वह लश्कर में भर्ती हुआ था। उसके पिता किसी तरह पाँच बच्चों का भरण-पोषण करते थे।
गरीबी से तंग आकर काम की तलाश में वह लाहौर चला गया और अंत में वहाँ लश्कर में शामिल हो गया। लश्कर-ए-तोइबा ने इसके बदले उसके परिवार को अच्छे पैसे दिए थे। डेढ़ वर्ष तक कड़े प्रशिक्षण के बाद उसे मुंबई भेजा गया। |