-वेबदुनिया न्यूज
मुंबई हमले में गिरफ्तार आतंकवादी से पुलिस और खुफिया सूत्रों ने जो जानकारी हासिल की है उससे यह साबित होता है कि अजमल अमीर कासब को हथियारों की काफी जानकारी है और वह जर्मनी में बनी एमपी5 जैसी अत्याधुनिक राइफल की मैकेनिज्म को अच्छी तरह जानता है। उसने पुलिस सूत्रों को जानकारी दी है कि उसे विभिन्न तरह के विस्फोटकों को चलाने का भी अच्छा अनुभव है।
लश्कर के उग्रवादियों ने उसका छद्म नाम मुजम्मिल दिया है और सारे आतंकवादी एक दूसरे को उनके ऐसे ही नामों से जानते थे। हालाँकि मीडिया में इस संबंध में जो भी रपटें प्रकाशित हुई हैं, उन पर कासब ने बताया है कि पाक अधिकृत कश्मीर के मंगला डैम में आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
कासब ने पूछताछ करने वालों को बताया है कि मानसेरा बट्टल हिल्स में उसके मॉड्यूल को हथियार चलाने और विस्फोटकों का उपयोग करना सिखाया गया था, जबकि समुद्र में युद्ध की कला का प्रशिक्षण कासमाबाद में दिया था।
पुलिस को आतंकवादियों के पास जो पहचान पत्र मिले हैं, उन्हें लेकर भी पुलिस दल परेशान हैं। कासब के पास समीर चौधरी के नाम का पहचान पत्र मिला था, जिसकी पहचान अरुणोदय कॉलेज के छात्र के रूप में दर्शाई गई थी।
अरुणोदय कॉलेज बेंगलुरु में है और इसको पहचान पत्र में टीचर्स कॉलोनी में स्थित बताया गया है, लेकिन जब पुलिस दल वहाँ गया तो पता लगा कि पता सही नहीं है। इस पहचान पत्र के बारे में कासब को कुछ भी पता नहीं है और उसे तो यह भी नहीं पता कि बेंगलुरु कहाँ है और वहाँ कोई अरुणोदय कॉलेज है भी कि नहीं।
दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी कह दिया है कि जैसा कि भारत दावा करता है उसके मुताबिक मुंबई हमलों में शामिल मोहम्मद अमीर कसाब नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि दक्षिणी पंजाब के खानेवाल जिले के फरीदकोट गाँव में इस नाम का कोई आदमी नहीं रहता है।
एक सरकारी अधिकारी ने समाचार पत्र को जानकारी देते हुए कहा कि नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (एनएडीआरए) के रिकॉर्ड में तीन आमिर हैं। उसका कहना है कि आमिर जो शफी का बेटा था वर्षों पहले उसकी मौत हो गई थी। हक नवाज का बेटा आमिर एक श्रमिक है और अहमद बख्श का बेटा आमिर हैं और दोनो जीवित हैं।
पाक के सरकारी सूत्रों का दावा है कि जलालुद्दीन का बेटा आमिर रिकॉर्ड के मुताबिक 25 वर्ष पहले मर चुका है और गाँव में आमिर अथवा आजम नाम का कोई आदमी नहीं है। इन सारे तथ्यों के आलोक में समझा जा सकता है कि आतंकवादियों को कितनी तैयारी के साथ भेजा गया है और पुलिस या खुफिया सूत्र जानना चाहें तो भी ऐसे लोगों के बारे में सही पता लगाना बहुत कठिन है। |