वाकपटुता न होने के कारण भारतीय छात्रों को ऑस्ट्रेलिया में कम वेतन में नौकरी करनी पड़ती है। 'इंडिया और विक्टोरिया बेहतर संबंध और व्यापार संभावनाएँ' विषय पर आयोजित सेमिनार में मेलबोर्न में भारत की महावाणिज्य दूत अनीता नायर ने उक्त बात कही है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत के विश्वविद्यालयों से स्नातक डिग्री प्राप्त छात्र यहाँ इलेक्ट्रिशियन, प्लम्बर अथवा भवन निर्माण का काम करते हैं, उन्हें वाकपटुता न होने के कारण कम वेतन में काम करना पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया में लगभग 70 हजार छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें से 40 हजार छात्र विक्टोरिया स्थित दूसरे विश्वविद्यालयों में पंजीकृत हैं।
विक्टोरिया के विश्वविद्यालय और दूसरे प्रशिक्षण संस्थान भारतीय विश्वविद्यालयों से अपने विभिन्न पाठ्यक्रमों को चलाने के लिए भारतीय विश्वविद्यालयों से तालमेल करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियाँ भारत में निवेश करने के प्रति काफी सचेत हैं। |