उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि छात्रों की फीस करयोग्य नहीं है।
न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति मुकुंदम शर्मा की पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए कहा कि छात्रों की फीस को करयोग्य मानकर याचिकाकर्ताओं के साथ न्याय नहीं हुआ है। छात्रों की फीस को करयोग्य मानना एक भूल है।
उच्च्तम न्यायालय ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की कि किसी विद्यालय को डोनेशन में मिली रकम को करयोग्य माना जा सकता है या नहीं।
न्यायालय ने इस मामले पर विचार कर इसका फैसला करने का कार्य संबंधित विभाग पर छोड़ दिया कि याचिकाकर्ता विवेकानंद स्कूल की आमदनी करयोग्य है या नहीं।
देहरादून जिला पंचायत ने स्कूल की वर्ष 1993-94 तथा 1994-95 के दौरान क्रमश: फीस के रूप में प्राप्त 2,86,472 रुपए तथा 3,32,435 रुपए को करयोग्य माना था। इस फैसले को स्कूल प्रशासन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। |