मुख पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > प्रादेशिक > बर्बरता की हदें लाँघ दी थी आतंकियों ने
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
बर्बरता की हदें लाँघ दी थी आतंकियों ने
महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस कह रही है कि मुंबई पर दस आतंकियों ने हमला किया था, जिसमें से 9 आतंकियों को मार गिराया गया है और एक को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन ताज और ओबेरॉय की बंधकों की बात माने तों होटलों में दस से बारह आतंकी थे और उनमें एक महिला भी थी। ओबेरॉय की ऊपरी मंजिल पर कमरे में बंद एक विमान कंपनी के कर्मचारी ने यह जानकारी दी।

बुधवार की रात ही होटल के कमरे में आए इस कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हमने देखा कि आतंकवादी दस से बारह की संख्या में थे और उनमें एक महिला भी थी जो उन्हें रिवॉल्वर लोड करके दे रही थी। आतंकी हर कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटा कर आवाज दे रहे थे। अगर कोई दरवाजा खोलता तो वह उसे जान से मार देते।

हालाँकि आतंकियों ने किसी भी कमरे को जबरदस्ती नहीं खोला। हम दो दिन तक पलंग के नीचे ही बैठे रहे। कमरे की लाइटें बंद कर दी थी और टॉयलेट भी नहीं जा पा रहे थे क्योंकि आवाज आ जाती। जब एनएसजी कमांडो ने हमें छुड़ाया तब हमें यकीन ही नहीं हो रहा था कि हम जिंदा है।

ताज होटल में भी दस से बारह आतंकवादी होने की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है कि सिर्फ दो आतंकवादी इतने लंबे समय तक एनएसजी के कमांडों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते। साथ ही आतंकियों के पास जो बैकपैक होने की बात कही जा रही है उसमें इतने हथियार और हथगोले लेकर जाना नामुमकिन है।

ताज होटल के रेस्तराँ में शादी की सालगिरह मनाने छह लोगों का एक परिवार गया था। इस परिवार के सारे सदस्य आतंकियों की गोलीबारी में मारे गए हैं। इनमें से दो की लाशें पहचानी गई है, लेकिन चार लाशों की पहचान नहीं हुई है। ताज में मिली ज्यादातर लाशे बुरी तरह क्षतिग्रस्त है जो जली है और सड़ने भी लगी है।

अब उसी परिवार के एक युवा सदस्य का खून लेकर डीएनए टेस्ट के बाद परिवार के सदस्यों की पहचान कराई जाने वाली हैं। इसके लिए दस से बारह दिन लगने वाले हैं, लेकिन अस्पताल वाले इतने दिनों तक लाश रखने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह पूरी तरह सड़ने लगी है।

सूत्रों ने बताया, आतंकियों ने लोगों को बुरी तरह हलाल कर मार दिया। किसी की जीभ काट दी, तो किसी का गला रेत दिया, किसी की आँखें निकाल दी। सारे आतंकी बेहद ही क्रूर थे और उन्हें लोगों को मारने में मजा आ रहा था।

इतना ही नहीं लोगों को मारने के बाद उन्होंने लाश पर एक तार से बम बाँध कर रखा था और उसे लाशों के ढेर में रखा, ताकि जब लाश उठाने कोई आए तो धमाका हो। यही वजह है कि एनएसजी को लाशें बाहर लाने में ज्यादा समय लगा क्योंकि एक तार काटने में पाँच से छह मिनट लग रहे थे।
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
पुलिस में नहीं जाना चाहता शहीद का बेटा
डेरा प्रमुख से पुलिस की पूछताछ
सो गया तो मर गया...!
बचने के गुर सीखते समय खाई गोली
सीएसटी से आठ किलो आरडीएक्स मिला
कौन है कासब की आतंकी बहन?