कामा अस्पताल में आतंकियों का सामना करते हुए शहीद हुए पुलिस इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे का बेटा प्रतीक पुलिस में नहीं जाना चाहता। प्रतीक ने कहा, पुलिस के पास अत्याधुनिक हथियार से लैस आतंकियों के साथ लडऩे के लिए हथियार नहीं है।
जिनके पास हथियार है वह नेताओं की सुरक्षा में लगे हैं। मुलुंड में प्रकाश मोरे के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित एक समारोह में प्रकाश मोरे का पूरा परिवार आया था।
प्रकाश मोरे 28 वर्ष से कार्यरत थे। उनकी ड्यूटी एलटी रोड़ पुलिस स्टेशन में थी। बुधवार 26 नवंबर को उनकी ड्यूटी खत्म हो गई थी और वह घर जाने की तैयारी कर रहे थे उसी समय कामा अस्पताल के पास फायरिंग की खबर आई तो प्रकाश मोरे अपना सर्विस रिवाल्वर लेकर वहाँ दौड़ पड़े।
कामा अस्पताल की पाँचवी मंजिल पर उन्होंने आतंकियों को देखा और फायरिंग शुरू की, लेकिन उनके रिवॉल्वर में सिर्फ तीन गोलियाँ थी। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया। घायल अवस्था में उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया और कहा कि बच्चों को बाहर न जाने दें, क्योंकि मुंबई में गोलीबारी हो रही है।
दूसरे दिन उनके परिवारवालों को उनकी मौत की खबर मिल गई। मोरे के घर में उनकी बीमार माँ, एक बेटा और एक बेटी है। मोरे की पत्नी माधवी मोरे ने बताया, मेरे पति ने पुलिस की सेवा समर्पित होकर की। वह कभी अपने बच्चों को घुमाने भी नहीं ले गए। घर में वह इकलौते कमाने वाले थे, उनके जाने के बाद अब हमारे परिवार का क्या होगा पता नहीं। बेटा प्रतीक पुलिस की नौकरी नहीं करना चाहता।
प्रतीक ने बताया, अब मुझे सरकारी नौकरी मिल सकती है, लेकिन मैं नहीं करना चाहता। मेरे पिता के पास अगर अत्याधुनिक हथियार होते तो उनकी मौत नहीं होती। |