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सुधाकर को पता था अपना भविष्य
मालेगाँव विस्फोट के सिलसिले में एटीएस महाराष्ट्र द्वारा कानपुर से गिरफ्तार सुधाकर द्विवेदी उर्फ अमृतानन्द उर्फ दयानंद पांडेय की ग्रहदशा आजकल ठीक नहीं चल रही है। उसकी जन्म पत्रिका में कालसर्प योग है, जिसकी उसे स्वयं जानकारी है। अमृतानंद का विश्वास है कि वह एक दिन राजनीति के उच्च पायदान पर अवश्य पहुँचेगा।

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यह मानना है सुधाकर के करीबी लोगों का। उनके मुताबिक सुधाकर ज्योतिष का भी प्रकांड विद्वान है। उसने अपनी जन्म-कुंडली देखकर भविष्यवाणी कर रखी थी कि मेरी पत्रिका में कालसर्प योग बनता है। इसके अनुसार मुझे दुर्दिन देखने पड़ सकते हैं। जेल की हवा भी खाना पड़ सकती है, किन्तु मेरे भाग्य में राजनीतिक भाग्योदय भी है।

एक ज्योतिषी ने बताया कि उन्होंने सुधाकर द्विवेदी उर्फ अमृतानंद की जन्म कुंडली का अध्ययन किया है। अमृतानंद की कुंडली में उनके दो ग्रह शनि और मंगल नीच के हैं। शनि सिंह राशि पर है। शनि न्याय का देवता है और यह काल 9 सितम्बर 2009 तक का योग बना रहा है, इसलिए इस समय अमृतानंद बेनकाब हो सकता है। हालाँकि जन्म-पत्री के अनुसार नीच भंग राजयोग भी बना रहा है।

सुधाकर के नजदीकी लोगों की मानें तो शुरुआत से ही उसे बेहिसाब धन कमाने का भूत सवार था। उसके पिता उदयभानधर द्विवेदी पुलिस के सबइंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। जब सुधाकर के पिता नवाबगंज में तैनात थे, उस समय सुधाकर का पड़ोस में रहने वाली एक लड़की दीपा के साथ चक्कर चल पड़ा।

कहा जाता है कि गैर बिरादरी की होने के कारण दीपा को सुधाकर के परिवार वालों ने स्वीकार नहीं किया। कुछ जानकार लोगों का कहना है कि इसी लड़की के साथ सुधाकर ने आर्य समाज विधि से शादी भी की, लेकिन उसके विवाह को परिवार वालों ने स्वीकृति नहीं दी।

बताते हैं कि कम्पनीबाग चौराहे पर सुधाकर ने दीपा और अपने नाम से दीपसुधा नाम की कम्पनी बनाई और फूड प्रोसेसिंग का काम शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक उसने चार्ज करने वाली बैट्री टार्च की भी सप्लाय की। कुछ के मुताबिक सुधाकर का एक और विवाह हुआ था। उसका एक बेटा भी है।

व्यापार में असफल होने के बाद सुधाकर वाराणसी पहुँचा, वहीं उसने 20 लाख रुपए देकर शंकराचार्य की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद जम्मू में पिछले 30 वर्षों से खाली चल रही शारदा सर्वज्ञ पीठ का पीठाधीश्वर बन बैठा।

लोगों ने बताया वह शांत स्वभाव का गम्भीर, चिंतनशील व्यक्ति है। कश्मीर जाने से पहले तक तो अनेक लोग उसे जानते थे, लेकिन कश्मीर में उसकी क्या गतिविधियाँ थीं, कोई नहीं जानता। सभी इतना जरूर कहते हैं कि सुधाकर राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहता था।
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