मानहानि का मुकदमा वापस लेने पर सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता छगन भुजबल से पुराना गिला शिकवा दूर करते हुए शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि भुजबल जहाँ हैं, खुश रहें।
पार्टी के मुखपत्र मराठी दैनिक 'सामना' में 'छगन सुखात रहा' (छगन खुश रहें) लिखे एक संपादकीय में ठाकरे ने उन दिनों को याद किया है, जब भुजबल ने पार्टी में रहकर शाखा प्रमुख से नगरसेवक, महापौर और विधायक बने। ठाकरे के अनुसार भुजबल ने 17 वर्ष पूर्व मंडल कमीशन के मुद्दे पर और विधानसभा में विपक्ष का नेता न बनाए जाने से खफा होकर पार्टी न छोड़ी होती तो संभव था बाद में जब शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सत्ता में आया तो वे मुख्यमंत्री बनते।
उल्लेखनीय है कि भुजबल जब 1991 में शिवसेना छोड़कर अपने सहयोगियों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे तो पार्टी और भुजबल के बीच काफी कटुता आ गई थी और 'सामना' समेत विभिन्न मंचों से भुजबल को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 1997 में पूर्वी उपनगर घाटकोपर के रमाबाई आम्बेडकर नगर में डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर की प्रतिमा की अवमानना की घटना हुई थी। अखबार ने एक कांग्रेसी कार्यकर्ता के हवाले से ही एक खबर प्रकाशित कर इस घटना के लिए भुजबल को जिम्मेदार ठहराया तो भुजबल ने मानहानि का मुकदमा दाखिल किया था। इस दौरान शरद पवार के कांग्रेस से अलग होकर राकांपा बनाने पर भुजबल उनके साथ चले गए। |