भाजपा के उपाध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा कि कांग्रेस और कुछ छद्म धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल कंधमाल मसले के राजनीतिकरण की कोशिश कर रहे हैं। यह वास्तव में धर्मान्तरण तथा कंधाओं और पना समुदायों के बीच भूमि अधिकार पर सामाजिक संघर्ष का मामला है।
नायडू ने कहा कि समस्या तब शुरू हुई जब धर्मान्तरित पना समुदाय के सदस्यों ने कंधाओं के स्वामित्व वाली जमीन पर व्यापारिक तरीके या धोखाधड़ी से कब्जा कर लिया और आरक्षण के लाभ हासिल करने के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जे के लिए दावा किया।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती की हत्या के पीछे एक समुदाय विशेष का हाथ होने का संदेह हैं, क्योंकि वह धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे। इस समुदाय विशेष ने अपनी गतिविधियों के लिए स्वामी लक्ष्मणानंद को अपने रास्ते का रोड़ा मानते हुए उन्हें निशाना बनाया।
नायडू ने कहा कि सामाजिक और स्थानीय समस्या को समझने की कोशिश करने के बजाय छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी होहल्ला मचा रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि धर्मान्तरण से सामाजिक तनाव, सामाजिक, धार्मिक संघर्ष और जनसांख्यिकी बदलाव हो रहे हैं। कंधमाल में हिंसा के पीछे लालच देकर धर्मान्तरण करना वजह रही है और इससे बचा जाना चाहिए।
उन्होंने इस मसले पर देशव्यापी बहस छेड़ने का आह्वान भी करते हुए कहा कि 1961 में एक समुदाय की आबादी दो प्रतिशत थी जो 2001 में बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई है। यह इस बात को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त है। |