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आरुषि मामले में आरोप-पत्र जल्द संभव
पहली बार देश की अग्रणी जाँच एजेंसी सीबीआई 13 सितंबर से पहले सनसनीखेज आरुषि हत्या मामले में कानूनी समीक्षा के लिए आरोप-पत्र दाखिल कर सकती है, जो प्रत्यक्ष प्रमाणों की बजाय वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित होगा।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा नोएडा दोहरे हत्या मामले में आरोप-पत्र परिस्थितिजन्य सबूतों, नार्को विश्लेषण और लाई डिटेक्टर परीक्षण तथा मनोवैज्ञानिक आकलन पर आधारित होगा। विशेषज्ञों ने कहा यह न्यायिक समीक्षा के सामने होगा व देश के अपराध जाँच इतिहास में ऐतिहासिक हो सकता है।

जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने मामले में तीन महीने तक कठोर जाँच की है, जिसमें किशोरी आरुषि और उसके परिवार के घरेलू नौकर हेमराज की नृशंस हत्या कर दी गई थी।

जाँच से आरुषि के पिता राजेश तलवार के लिए काम करने वाले कंपाउंडर कृष्णा और तलवार के पड़ोसी के घर काम करने वाले राजकुमार तथा एक अन्य घरेलू नौकर विजय मंडल की गिरफ्तारी हो सकी। सूत्रों ने कहा आरोप-पत्र कृष्णा राजकुमार और मंडल के खिलाफ दाखिल किए जाने की संभावना है।

इनमें मंडल को हाल ही में सीबीआई के वकील के पुरजोर विरोध के बावजूद एक विशेष अदालत ने जमानत दे दी। सीबीआई के वकील का कहना था कि वह सबूतों को नष्ट करने का प्रयास कर सकता है।

आरोप-पत्र 13 सितंबर से पहले दाखिल किए जाने की संभावना है, क्योंकि सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी 13 जून को की थी और जाँच एजेंसी के लिए अनिवार्य है कि वह पहली गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करे अन्यथा अभियुक्त स्वतः जमानत के लिए आवेदन कर सकता है।

सीबीआई की जाँच के अनुसार तलवार का कंपाउंडर कृष्णा मुख्य संदिग्ध के तौर पर उभरा, क्योंकि उसके मनोवैज्ञानिक परीक्षणों और पॉलीग्राफिक परीक्षण ने अपराध से जुड़े सभी प्रमुख विन्दुओं पर छिपाना जाहिर किया।

आरोप-पत्र में आरुषि के पिता को क्लीनचिट दिए जाने की संभावना है। नोएडा पुलिस ने तलवार को 23 मई को गिरफ्तार किया था। करीब 50 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत को सूचित किया था कि उसे तलवार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला और नोएडा पुलिस ने भी कोई साक्ष्य नहीं पाया।

एजेंसी ने कहा तलवार और उनकी पत्नी नूपुर दोनों का दो बार पॉलीग्राफ परीक्षण किया गया और बाद में उनका मनोविश्लेषण भी हुआ तथा उनके खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल नहीं पाया गया।

इसके अलावा एजेंसी ने अपराध के समय ध्वनि के स्तर को जाँचने के लिए छद्म अभ्यास किया, जिसमें सीएफएसएल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली गई। यह अभ्यास दो स्वतंत्र गवाहों के समक्ष तलवार और आरुषि के कमरों में दोनों एयरकंडिशनर चालू कर किया गया। सूत्रों ने कहा चलने या दरवाजा खोलने की कोई आवाज तलवार के कमरे में सीएफएसएल के भौतिकी विभाग के विशेषज्ञों को नहीं सुनाई दी।
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