उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों से आगे आने की अपील की है।
सुश्री मायावती ने हाल ही में इस आशय के पत्र राज्य के ग्रामप्रधानों से लेकर सांसदों तक लिखे हैं।
एक पेज के पत्र में सुश्री मायावती ने लिखा है कि कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाकर लिंग अनुपात के भारी अन्तर को रोकने के लिए सरकार की मदद करें।
पत्र में बताया गया है कि छह वर्ष तक के बच्चों में लड़के और लड़कियों की जनसंख्या के अनुपात का अन्तर बढ़ रहा है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने 2007-08 में केवल लखनऊ में हुए 11940 और 2006-07 में 9522 गर्भपात को गंभीरता से लिया है और अब इसे रोकने के लिए हरसम्भव कदम उठाने का निश्चय किया है।
इन रिपोर्टों से सकते में आये मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे रोकने के लिए जनप्रतिनिधियों की मदद का भी निर्णय लिया। सुश्री मायावती ने लिखा है कि कन्या भ्रूण हत्याओं को रोकने का प्रयास करना राजनेताओं की भी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने लिखा है कि पुरुष और महिलाओं की जनसंख्या के अनुपात में पड़ोसी राज्य बिहार और मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड, उत्तरप्रदेश से बेहतर है।
2001 की जनगणना के अनुसार उत्तरप्रदेश में जहाँ यह अनुपात 1000 और 909 का है, वहीं बिहार में 1000 और 942 तथा 1000 पर 932 का है।
पंजाब में दोनों का अनुपातिक अन्तर सर्वाधिक है। वहाँ 1000 पुरुषों के अनुपात में मात्र 798 महिलाएँ हैं, जबकि हरियाणा में यह 1000 पर 819 का है।
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को लिखा है कि लड़कियों और लड़कों की जनसंख्या में इतना अन्तर होते हुए लड़कियों पर होने वाले अत्याचार को रोकना काफी मुश्किल है।
शिक्षा और सम्पन्नता के मामले में उत्तर प्रदेश का विकसित क्षेत्र माने जाने वाले पश्चिमी क्षेत्र में भी दोनों के अनुपात में काफी अन्तर है।
इन क्षेत्रों में एक हजार लड़कों पर बागपत में 847, आगरा में 849, गाजियाबाद में 851, बुलन्दशहर में 866, हाथरस में 881 और अलीगढ़ में मात्र 886 लड़कियाँ हैं, जो राज्य के पूरे अनुपात से काफी कम है।
सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले मानते हैं कि कन्या भ्रूण हत्या पर रोक के लिए केवल शिक्षा, पढ़ाई से ही काम नहीं चलेगा। इसके लिए दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों को भी दूर करना होगा।
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