श्रीअमरनाथ संघर्ष समिति राज्यपाल एनएन वोहरा द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति के साथ भूमि विवाद पर बातचीत के लिए जल्दी ही एक दल नामित करेगी। समिति के संयोजक लीलाकरण शर्मा ने बुधवार शाम यहाँ कहा हम उनसे बातचीत के लिए अपने सदस्य नामित करेंगे और हमें मुद्दे पर विचार-विमर्श करने में कोई हिचक नहीं है।
मुद्दे पर बातचीत के लिए समय और तारीख का उल्लेख किए बिना शर्मा ने कहा कि समिति द्वारा फैसला करने के बाद एक दो दिनों में ऐसा हो सकता है।
राज्यपाल समिति द्वारा हाल ही में भेजे गए संवाद के बारे में शर्मा ने कहा कि बातचीत के लिए प्रस्तावित पाँच सूत्री एजेंडे में कुछ अस्पष्टता है। उन्होंने कहा यह यात्रा बोर्ड द्वारा भूमि के उपयोग के लिए व्यवस्था से संबंधित है। इसके साथ ही उन्होंने समिति के संवाद को मुद्दे के हल में देर करने वाला कदम बताया।
शर्मा ने कहा हम समिति पर यह लाँछन नहीं लगने देना चाहते कि वह वार्ता के लिए तैयार नहीं है। इस कारण हमने बातचीत को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी, लेकिन अंततः प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को इस मुद्दे पर हमसे बातचीत करनी होगी।
इस बीच राजभवन के एक प्रवक्ता ने कहा राज्यपाल की समिति ने संघर्ष समिति को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकल सके।
राज्यपाल के सलाहकार एसएस बलोरिया चार सदस्यीय समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जीडी शर्मा, जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति अमिताभ मट्टू और राज्यपाल के प्रधान सचिव बीबी व्यास शामिल हैं।
शर्मा ने कहा उनका यह आंदोलन जारी रहेगा और 24 अगस्त को क्षेत्र में लोगों को आंदोलन तेज करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इसके एक दिन बाद क्षेत्र में संपूर्ण बंद रहेगा और निजी गाड़ियों को भी परिचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस दौरान मीडिया के लोगों तथा मरीजों को लेकर जाने वाली गाड़ियों को हड़ताल के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
शर्मा ने राजनीतिक पार्टियों तथा सामाजिक संगठनों से उनके आंदोलन को समर्थन करने और आंदोलन को तहसनहस करने के लिए राज्य सरकार द्वारा थोपे गए तत्वों को अलग-थलग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कश्मीर घाटी में कथित तौर पर आर्थिक नाकेबंदी के बारे बहुत सारी गलत सूचनाएँ लोगों को दी गई हैं। जब राजमार्गों पर सेना तैनात है तो वाहनों का परिचालन सुरक्षित रूप से क्यों नहीं हो सकता है।
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