पुलिस के हाथ जिन गुनहगारों के गिरेबाँ पर होना चाहिए, वह उनसे मिलकर जेबें गरम कर रही है। वर्दी की शह पर तस्कर नकली नोटों का जाल बुन रहे हैं। खाकी से अब अपराधी डरते नहीं, बल्कि उसकी निगरानी में बेखौफ होकर सरहद पार से गोला-बारूद देश में पहुँचाते हैं।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और सपा विधायक माताप्रसाद पांडेय के इन संगीन आरोपों पर यकीन करें तो खाकी का भी दामन दागदार नजर आता है, क्योंकि उन्होंने सिद्धार्थनगर एसपी और एक दरोगा को डंके की चोट पर कटघरे में खड़ा किया है। विधानसभा में मंगलवार को नेपाल से सटे उप्र के सीमावर्ती जिलों में धड़ल्ले से जाली नोटों के कारोबार और सीमा पार से असलहा की तस्करी का मामला उठाया।
सिद्धार्थनगर के एसपी पर सीधे-सीधे हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जाली नोटों के धंधे में उनकी अपराधियों से साठगाँठ है। उन्हीं के संरक्षण में जाली नोटों का कारोबार फल-फूल रहा है।
अपने आरोपों की पृष्ठभूमि में उन्होंने डुमरियागंज के भारतीय स्टेट बैंक का हवाला दिया, जहाँ के करंसी चेस्ट में एक अरब चौरासी करोड़ रुपए जमा थे। जाँच में यहाँ एसटीएफ (स्पेशन टास्क फोर्स) ने पाया था कि एक करोड़ सत्तर लाख रुपए से अधिक की मुद्रा नकली है।
उन्होंने कहा वे पिछले एक साल से इस बात को कहते आ रहे हैं, किन्तु सरकार ने कभी कान नहीं दिए। काठमांडू से असलहा भी प्रदेश में लाकर कानपुर ले जाया जाता है।
एक दरोगा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा 29 जुलाई को करेंसी चेस्ट डुमरियागंज की तलाशी के बाद उस दरोगा के इटवा स्थित भारतीय स्टेट बैंक के खाते में चार लाख रुपए जमा हुए। इसकी उच्च स्तरीय जाँच होना चाहिए। उन्होंने कहा चूँकि करंसी चेस्ट में एसटीएफ ने छापा मारा, इसलिए मामला खुल गया, वरना जिला पुलिस की मिलीभगत का पता भी नहीं चलता।
भाजपा के डॉक्टर राधारमण अग्रवाल ने भी जाली नोटों के धंधे की पुष्टि करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर के एसपी वहाँ के एक स्थानीय पत्रकार को इसलिए धमका रहे हैं, क्योंकि उसने अपने अखबार में हकीकत बयाँ की थी। संसदीय कार्यमंत्री लालजी वर्मा ने सदस्यों का जवाब देते हुए कहा कि एसटीएफ ने सिद्धार्थनगर में जाली नोटों के धंधे का पर्दाफाश किया और अब मामले की जाँच एसआईटी कर रही है।
सरकार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी : मंगलवार को विधानसभा शुरू होते ही विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव ने नोएडा में हुई किसानों पर फायरिंग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों पर गोली चलवाने का औचित्य क्या था? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतांत्रिक ढंग से नहीं चलाई तो यह सरकार पाँच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी।
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