आईटी शहर बेंगलूरु शुक्रवार को दोपहर एक के बाद एक नौ विस्फोटों से थर्रा उठा। इन धमाकों में एक महिला की मौत हो गई और कम से 12 अन्य के घायल हो गए।
ये विस्फोट दोपहर डेढ़ से पौने दो बजे के बीच आडुगोडी, माडीवाला, नंयदाहल्ली, मैसूर रोड, रिचमंड सर्किल, पंथारापाल्या तथा विट्टल माल्या रोड पर हुए। विस्फोटों में देशी बमों का इस्तेमाल किया गया। विस्फोटक सामग्री में नट और बोल्ट भी थे। उन्हें शरणार्थी शिविरों के पास और सड़क किनारे छिपाकर रखा गया था।
माडीवाला में एक बस स्टॉप पर इंतजार कर रही एक महिला विस्फोट में मारी गई, जबकि उसका पति और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
नगर पुलिस आयुक्त शंकर एम बिदरी ने बताया कि चार विस्फोट होसूर रोड तथा माडीवाला के बीच हुए जबकि तीन अन्य नयंदाहल्ली, विट्टल माल्या रोड तथा रिचमंड सर्किल में हुए। उन्होंने बताया कि दो जगहों के अलावा विस्फोटों में कम तीव्रता वाली विस्फोटक सामग्री इस्तेमाल की गई। विस्फोट कुछ मिनटों के अंतराल पर हुए।
सिमी पर शंका : पुलिस ने जिन स्थानों पर विस्फोट हुए उनमें से एक के पास से जिलेटिन की छड़ें बरामद कीं। किसी भी समूह ने फिलहाल विस्फोटों की जिम्मेदारी नहीं ली है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया विस्फोटों के पीछे प्रतिबंधित सिमी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का हाथ हो सकता है और कम तीव्रता वाले उपकरणों को जोड़ने की दक्षता शायद पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तोइबा ने सुलभ कराई है।
प्रधानमंत्री ने निंदा की : प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने इन सिलसिलेवार धमाकों की निंदा करते हुए जनता से शांत रहने और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने की अपील की। उन्होंने प्रत्येक मारे गए व्यक्ति के परिजन को एक-एक लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने राज्य मंत्रिमंडल की आपात बैठक के बाद कहा यह माहौल प्रदूषित करने तथा लोगों में भ्रम पैदा करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने लोगों से अफरा-तफरी नहीं मचाने तथा शांति कायम रखने की अपील की। कैबिनेट मीटिंग में येदियुरप्पा ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए मुआवजे के रूप में देने की घोषणा की।
यातायात प्रभावित : विस्फोट की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में शॉपिंग मॉल और स्कूल बंद कर दिए गए। कुछ मार्गों पर पुलिस ने बैरिकेट्स लगा दिए और उन्हें अस्थायी तौर पर बंद कर दिया। इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। विस्फोट स्थलों पर नेता, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, मीडियाकर्मियों और जिज्ञासु लोगों की भारी भीड़ जमा थी।
बेंगलूर पुलिस के बम निरोधक दस्ते तथा खोजी कुत्तों को भी जाँच में लगाया गया है। अरुण डेनियल नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि मैंने जब पहली बार धमाका सुना तो मुझे लगा कि पटाखा फटा है, लेकिन बाद में मैंने लोगों को भागते देखा, तब मेरे मित्रों ने मुझसे कहा कि यह विस्फोट है।
कर्नाटक के डीजीपी श्रीकुमार ने उन सवालों को टाल दिया जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या इन धमाकों के पीछे किसी आतंकवादी संगठन का हाथ है। उन्होंने कहा कि किसी भी समूह पर तब तक दोषारोपण नहीं किया जा सकता जब तक कि जाँच पूरी नहीं हो जाती।
उन्होंने कहा कि हम तब तक किसी समूह पर दोषारोपण नहीं कर सकते जब तक कि जाँच पूरी नहीं हो जाती। मैं लोगों से अपील करता हूँ कि विस्फोट के बारे में लोगों के पास जो कुछ भी जानकारी हो उसे वे बाँटें। यह जाँच में सहयोग करेगा। श्रीकुमार ने कहा कि विस्फोट कम तीव्रता के थे। वे नक्सल समस्या पर विचार करने के लिए दक्षिण भारतीय राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चेन्नई में थे।
सीआईएसएफ की सुरक्षा : देश के प्रमुख आईटी केन्द्र बेंगलुरु के आतंकवादियों के निशाने पर आने के बीच गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि केन्द्र कानून में संशोधन करने को राजी है, ताकि वहाँ की अरबों डॉलर के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को सीआईएसएफ सुरक्षा मुहैया करा सके। उद्यान नगरी में इन्फोसिस और विप्रो सहित करीब 1500 विदेशी एवं घरेलू आईटी कंपनियाँ हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी 28 दिसंबर 2005 को बेंगलुरु के विज्ञान भवन में हुए आतंकवादी हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि 4 अन्य घायल हो गए। बेंगलुरु आईटी का बड़ा सेंटर है और यहाँ से भारी मात्रा में सॉफ्टवेयर निर्यात किया जाता है। हाल के विस्फोटों का सिलसिलेवार ब्योरा विस्फोटों के बाद राज्यों में हाई अलर्ट आतंकी तंत्र का पर्दाफाश करने में केन्द्र नाकाम सरकार की छवि बिगाड़ने की साजिश-येदियुरप्पा कर्नाटक सरकार को चेताया था-जायसवाल बम विस्फोट कायरतापूर्ण करतूत-सोनिया
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