मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने व्यवस्था दी है कि कंडोम की बिक्री के लिए अश्लील विज्ञापन का सहारा नहीं लिया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश एके गांगुली और न्यायमूर्ति पी ज्योतिमणि की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर यह व्यवस्था दी।
शहर के एक व्यवसायी सी. रविकुमार ने कंडोम के पैकेटों एवं उसके विज्ञापन में अश्लील चित्रों पर प्रतिबंध लगाए जाने के लिए न्यायालय में यह जनहित याचिका दायर की थी।
रविकुमार का कहना था कि अश्लील चित्रों से कंडोम के बारे में गलत धारणा पैदा होती है, जबकि वह एक चिकित्सीय उत्पाद है न कि यौन इच्छा पैदा करने वाला उत्पाद।
खंडपीठ ने आदेश दिया कि सभी विपणन गतिविधियाँ भारतीय विज्ञापन मानक परिषद से प्रमाणित होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 19 के तहत व्यापार करने का जो अधिकार प्रदान किया गया है, उसमें यह भी प्रावधान है कि शालीनता एवं नैतिकता के लिए ऐसे अधिकार पर तर्कसंगत प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।
खंडपीठ ने कहा कि शालीनता एवं नैतिकता के मापदंड तय करना अदालत के लिए मुश्किल है, ऐसे में परिषद ही यह काम बेहतर ढंग से कर सकती है।
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