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अपने ही घर में नाकाम रहे आजाद  Search similar articles
चरम स्थितियों में भी कांग्रेस की नैया पार कराने के लिए मशहूर रहे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलामनबी आजाद अपने ही घर में नाकाम रहे और उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा।

जीवन के 59 पायदान तय कर चुके आजाद ने यह कहते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी को अलविदा कह दिया कि वह सियासी जोड़-तोड़ और दलबदल का रास्ता नहीं अपनाएँगे।

केरल, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश समेत अनेक प्रमुख राज्यों में पार्टी की चुनावी नैया पार लगाने वाले कांग्रेस के संकट मोचक आजाद ने तब सियासी हलकों में हलचल मचा दी थी, जब उन्होंने 2002 में जम्मू-कश्मीर में पार्टी को जीत से हमकिनार किया था।

आजाद की असली कुवत उनका सांगठनिक प्रबंधन कौशल है। वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के रिकॉर्ड नौ बार महासचिव रहे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति के 18 साल तक सदस्य रहे, जो संभवतः किसी मौजूदा कांग्रेस नेता के लिहाज से रिकॉर्ड है।

केन्द्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने कांग्रेस सरकारों को लगातार 21 अविश्वास प्रस्तावों में जीत दिलाई। इनमें 1990 के दशक की शुरुआत में पीवी नरसिंह राव की अल्पमत सरकार भी शामिल है।
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