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बिन बाराती, बिन घराती...हो गई शादी  Search similar articles
किसी ने सात फेरे के समय पहनने के लिए शानदार शेरवानी सिलाई थी, तो किसी ने मेहमानों की आवभगत कर उन्हें 56 भोग खिलाने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन इंदौर में शुक्रवार से जारी के बाद विवाह वाले घरों में तैयारियाँ धरी की धरी रह गईं। विवाह तो हुए, लेकिन कर्फ्यू के साए में और मात्र चंद लोगों के बीच रस्में निभाई गईं।

याद रहेगा जीवनभर यह पल : दुल्हन रितु जैन के मामा अनिल मोदी बताते हैं विवाह का घर था, लोग दूर-दूर से आने वाले थे, जो कर्फ्यू के कारण नहीं आ सके। विवाह के लिए जिस पंडित को बुक करा था, उन्होंने एवं ब्यूटीशियन दोनों ने आने से इंकार कर दिया।

दुल्हन रितु जैन का कहना है जिस माहौल में विवाह हुआ, उसे मैं जीवनभर नहीं भूल सकूँगी। दूल्हा बने दीपक जैन बताते हैं कि मेरे दोस्त कर्फ्यू के कारण विवाह समारोह में नहीं आ सके। शहर में आते ही चार-पाँच बार गाड़ियों को रोका गया।

कोई दोस्त नहीं आ पाए : विजय भार्गव के बेटे ऋषि भार्गव का विवाह आज होना है। भार्गव बताते हैं कि इसके लिए हमने काफी तैयारी की थी। मेहमान एक-दो दिन पहले ही आ गए थे, इस वजह से हमने दो दिन के लिए धर्मशाला बुक कर ली। दूल्हा ऋषि बताते हैं कि शनिवार 5 जुलाई को सगाई की रस्म थी। मैंने शेरवानी सिलने के लिए दी थी, लेकिन कर्फ्यू के कारण नहीं मिल पाई। बाहर के दोस्त भी कर्फ्यू की वजह से नहीं आ पाए।

1 हजार लोगों को बुलाया था : सुलोचना पंडित का कहना है मेरी बेटी दिप्ती की शादी पार्टी थी लगभग 1 हजार लोगों को बुलाया था, लेकिन कर्फ्यू के कारण लोग आ नहीं पाए हैं। इससे हमारा काफी नुकसान हुआ है। शादी तो 6 जुलाई की है। 5 जुलाई को तो रिसेप्शन था। इसमें इंदौर के बाहर से आने वाले लोगों को फोन द्वारा सूचित करके मना किया।

हमारा निवास राजेन्द्र नगर में है। वहाँ से शादी स्थल कलश मण्डपम तक आने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान बस को चार जगह रोका गया। वहीं दुल्हन दिप्ती पंडित बताती हैं कि मैंने अपने मेकअप के लिए ब्यूटीशियन को बुक कर रखा था, लेकिन उसने भी आने से मना कर दिया। इस वजह से घर पर ही तैयार होना पड़ा। वहीं हाल, फूल और गजरे भी राऊ से लाना पड़े।

सुबह आना थी बारात : विजय नगर निवासी डॉ. अतुल खराटे कहते हैं कि मेरी बेटी डॉ. नम्रता की बारात देवास से 5 जुलाई सुबह आने वाली थी, लेकिन वह भी कर्फ्यू के कारण सुबह तक नहीं आ पाए। दो दिन पहले से घर पर मेहमान आना शुरू हो गए थे, लेकिन दिल्ली, पुणे, मुंबई, नासिक, लखनऊ के मेहमानों को मना करना पड़ा।

वे बताते हैं कि पंजाब अरोड़वशीय धर्मशाला में जब हम आए तो यहाँ पर हलवाई नहीं पहुँचा था। हलवाई को जब घर से लेकर आए तो रास्ते में कई बार पुलिस ने हमें रोका। जब उन्हें शादी की पत्रिका दिखाई तो उन्होंने जाने दिया। इसके अलावा बैंड और घोड़ी वालों को जो एडवांस दिया था, उसका भी नुकसान हमें झेलना पड़ा। हमारे घर में यह पहली शादी थी। जिसे इंजॉय करना था।

कर्फ्यू में लिए सात फेरे : सयाजी होटल में हुए एक विवाह समारोह में पुरानी कहावत फिर सही साबित हो गई कि जनम-मरण-परण जब होना होता है तभी होता है, ना एक पल पहले न एक पल बाद। अंतरजातीय विवाह में बँधने वालीं स्मिता जैन और अभिजीत टुटेजा दोनों प्रेस्टीज कॉलेज में पढ़ते थे। शनिवार को दो साल से बिछुड़े वर-वधु एक दूसरे से सात जन्मों के बंधन में बँध गए।

ND
पूरे परिवार के लिए यह इत्तेफाक था जब कर्फ्यू में शादी हो रही थी। अजमेर की रहने वाली स्मिता और इंदौर के अभिजीत को मलाल था कि उनके सभी दोस्त शादी में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि मुंबई से आया डीजे ग्रुप प्रस्तुति नहीं दे सका। पंजाबियों की शादी में ढोल-ताशे का जोरदार संगीत न हो और बारात ना निकले तो मजा तो किरकिरा होता है। प्रशासन की मदद से एलआईजी स्थित गुरुद्वारे में विवाह की रस्म संपन्न हुई।

नहीं सोचा था ऐसे होगी शादी : रामचंद्र नगर निवासी नवीन कुशवाह की शादी 9 जुलाई को है, अन्य मांगलिक कार्य प्रारंभ हो चुके हैं जो बिना मेहमान और पंडित हो रहे हैं। नवीन के पिता शिवनारायण कुशवाह को अब चिंता इस बात की है कि कर्फ्यू के कारण कहीं शादी स्थगित न करनी पड़े।

शनिवार को खलमिट्टी, मंडप और कथा थी परन्तु न तो वे कलश ला पाए और न ही रिश्तेदार व पंडित आ पाए इसलिए घर के सदस्यों ने ही सभी रस्में सीमित साधनों से निभाईं।

नवीन बताते हैं कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि इन परिस्थितियों में उनका विवाह होगा और कोई भी रिश्तेदार शरीक नहीं हो पाएगा। यही नहीं वैवाहिक रस्मों के फोटो भी नहीं हो पाए। अब तो वे यही प्रयास कर रहे हैं कि प्रशासन से विवाह कराने की मदद लें।
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