हाथी की सवारी बच्चों को आनंद विभोर करती है पर्यटन उद्यमों की शान में चार चाँद लगाती है और परेड तथा पर्व त्योहारों को रंग बिरंगा बनाती है, लेकिन उनके पोषण में कमी, मालिकों द्वारा उनसे दुर्व्यवहार तथा ज्यादा काम लेने से दुनिया के इस सबसे बड़े पशु के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। कभी पूजित होने वाले और अब टीबी से ग्रसित दक्षिण भारत में पाए जाने वाले एशियाई हाथियों को 'पेटा' प्राणियों के खिलाफ अत्याचार का विरोध करने वाले संगठन के रूप में एक नया सहयोगी मिल गया है। संगठन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे संदेश में आनंद के लिए हाथियों पर बैठ कर होने वाली सैर पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की माँग की है। स्वास्थ्यमंत्री अंबुमणि रामदास को लिखे पत्र में संगठन ने बंधक बनाए गए पशुओं में खतरनाक फेफड़े की बीमारी उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम टयूबरक्यूलोसिस के प्रसार पर रोक के लिए आमलोगों के लिए परामर्श जारी कर इन हाथियों को रोगों से बचाने के लिए कदम उठाने की अपील की है। पेटा भारत की मुख्य अधिकारी अनुराधा स्वाहिनी ने इनके सूढ़ के पोस्टमार्टम का उदाहरण देते हुए बताया है कि किस तरह दक्षिण भारत में बंधक रखे गए दाँत वाले हाथियों में टीबी की बीमारी फैल रही है। स्वाहिनी ने कहा कि हाथी परियोजना के तहत केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट कहती है कि बंधक रखे गए 387 में से 59 हाथियों में संक्रमण की पुष्टि की गई है।
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