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मानवाधिकार हनन में उत्तरप्रदेश अव्वल  Search similar articles
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि पिछले 3 साल से मानवाधिकार हनन के मामले में देश में उत्तरप्रदेश लगातार पहले स्थान पर कायम है तथा प्रदेश में मानवाधिकार के हनन के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।

आयोग के सूत्रों ने बताया कि पिछले 3 साल में आयोग को जितनी भी शिकायतें मिली हैं, उनमें सर्वाधिक मामले उत्तरप्रदेश के हैं। इस साल जितने भी मामले दर्ज किए गए हैं उनमें भी आधे से अधिक मामले उत्तरप्रदेश से ही दर्ज हुए हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा पिछले 3 साल में प्रदेश में मानवाधिकार हनन की घटनाएँ भी बढ़ी हैं। वर्ष 2007 में उत्तरप्रदेश से जहाँ 58 हजार 323 मामले दर्ज हुए, वहीं यह आँकड़ा वर्ष 2006 में 51 हजार 444 था जबकि इसके पिछले साल यह आँकड़ा 44 हजार 560 था। इस वर्ष साल के पहले 5 महीने में यह आँकड़ा 21 हजार 700 को पार कर चुका है।

सूत्रों ने बताया कि इस साल पहले 5 महीने में पूरे देश से 37 हजार 686 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से भी आधे से अधिक मामले उत्तरप्रदेश के हैं।

साल के पहले 5 महीने में उत्तरप्रदेश से 21 हजार 758 मामले दर्ज किए गए। सूत्रों ने यह भी कहा कि पिछले 3 साल और उससे भी पहले के आँकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि देश में मानवाधिकार हनन के सबसे अधिक मामले उत्तरप्रदेश से ही आते हैं।

सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2007 में पूरे देश में 98 हजार 539 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक मामले उत्तरप्रदेश के रहे। पिछले साल उत्तरप्रदेश से 58 हजार 323 मामले दर्ज किए गए।

मानवाधिकारों के हनन के मामले में वर्ष 2006 में भी उत्तरप्रदेश पहले स्थान पर रहा। देश से दर्ज मामलों का 50 फीसदी से अधिक प्रदेश से ही रहा। इस साल पूरे देश से 80 हजार 971 मामले दर्ज किए गए जबकि उत्तरप्रदेश से 51 हजार 444 मामले दर्ज किए गए।

इसके पिछले साल जहाँ पूरे देश में 74 हजार 400 से अधिक मामले दर्ज किए गए वहीं उत्तरप्रदेश से 44 हजार 500 से अधिक मामले थे।

यह पूछे जाने पर कि उत्तरप्रदेश से दर्ज होने वाली शिकायतों में सबसे अधिक मामले किस प्रकार के हैं, तो उन्होंने कहा इस साल और पिछले साल जितने भी मामले प्रदेश से दर्ज किए गए हैं, उनमें से सबसे अधिक मामले पुलिस अत्याचार के हैं।

सूत्रों ने यह भी कहा कि उत्तरप्रदेश ही नहीं, वरन पूरे देश से दर्ज पिछले साल और इस साल के सर्वाधिक मामले पुलिस अत्याचार के ही हैं।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार हनन के मामले में सबसे अधिक मामले अत्याचार के ही दर्ज होते हैं। अत्याचार की प्रकृति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पुलिस अत्याचार के अलावा इन मामलों में अपनों के अत्याचारों की भी प्रमुखता होती है।
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