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सेनीटेशन प्रबंधन के लिए इको-फ्रेंडली तरीके  Search similar articles
पहले से ही भीड़भाड़ से ग्रस्त मुंबई जैसे महानगरों में धार्मिक स्थानों पर सेनीटेशन की हालत और बुरी रहती है, क्योंकि इन जगहों पर लाखों की संख्या में लोग एक साथ जमा रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब ऐसी जगहों पर सेनीटेशन का प्रबंधन पर्यावरण हितैषी तरीके से किया जाएगा जो प्रयोगों में काफी सफल सिद्ध हुए हैं।

भारत में धार्मिक स्थानों पर अमूमन साफ-सफाई की दुर्गति ही रहती है, क्योंकि ऐसी जगहों पर लोग लाखों की संख्या में जमा होते हैं और नित्य कर्मों से निवृत्त होने के लिए खुली जगह का उपयोग करते हैं। इस वजह से आसपास का पूरा वातावरण ही दूषित हो जाता है। ऐसे क्षेत्रों से उठने वाली दुर्गंध कई लोगों को साँस लेना भी दूभर कर देती है। इसके अलावा लोगों द्वारा फेंका गया कचरा भी भारी गंदगी पैदा करता है।

अगर इस सबका ठीक ढंग से प्रबंधन नहीं किया जाए तो कई प्रकार के पैथोजन, जीवाणु, विषाणु पैदा होते हैं जो इनसानों में घातक रोग पैदा कर सकते हैं। ये चीजें जमीन के अंदर जाकर न सिर्फ मिट्टी को प्रदूषित करती हैं, बल्कि भूजल को भी प्रदूषित करती हैं, लेकिन अब सिर्फ कुछ तरीकों को अपनाकर इन बातों से छुटकारा पाया जा सकेगा।

इस बारे में वैकल्पिक प्रौद्योगिकी के निदेशक रवीन्द्र ध्यानसागर बताते हैं कि हमने कुछ ऐसे स्प्रे (छिड़काव) विकसित किए हैं जो इस गंदगी के विघटन (सड़ाने) में मदद करेंगे। यह बेनिफिशियल बेक्टीरियल कंबाइन (बीबीसी) और डियोड पावडर हैं जिन्हें प्राकृतिक खनिजों से तैयार किया गया है।

इन स्प्रे और पावडरों को गंदगी पर छिड़ककर उसे प्राकृतिक रूप से जल्दी ठिकाने लगाया जा सकता है। ध्यानसागर बताते हैं कि कुछ धार्मिक स्थानों पर इन स्प्रे और पावडर का प्रयोग भी किया गया जो पूरी तरह सफल रहा है।
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