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काले घोड़ों पर शनि की साढ़े साती  
शनि की साढ़े साती और ढैया के दुष्प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिषियों की सलाह से काले घोड़े की नाल की अँगूठी पहनने या नाल मकान में लगाने से व्यक्ति का भला होता है या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन इन सबमें काले घोड़ों की शामत जरूर आ गई हक्योंकि घोड़े के मालिक अब घोड़ों की सेहत तो कम नाल बेचने के अपने धंधे पर अधिक ध्यान देने लगे है।

गुलाबी नगरी जयपुर के मुख्य मार्गों के किनारे काले घोड़े के पाँव कुरेदता व्यक्ति नजर आना सामान्य हो गया है। यह व्यक्ति शनि की साढे़ साती या ढैया से प्रभावित व्यक्ति के इंतजार में है।

काले घोड़े के पास खड़ा व्यक्ति यदि घोड़ा मालिक से बात कर रहा है तो आसानी से समझा जा सकता है वह शनि के प्रभाव को कम करने या लाभ लेने के लिए काले घोड़े की नाल का मोल-भाव कर रहा है। जयपुर के अर्ल्बट हाल संग्रहालय के पिछवाडे़ काले घोड़े को लेकर खडे़ रशीद खान ने कहा कि काले घोड़े की करीब पाँच छह नाल रोज बिक जाती हैं।

कभी-कभार यह संख्या दस से ऊपर पहुँच जाती है। उसने अपनी जेब से निकाली लोहे की नाल की कीमत पचास रुपए बताई जबकि पास खडे़ काले घोड़े की नाल निकाल कर देने की कीमत ढाई सौ रुपए बताई।

काले घोड़े के स्वामियों ने शनि की आड़ में नाल बेचने को अपना धंधा ही बना लिया है। यह अलग बात है कि बार-बार नाल बदलने से घोड़े के पाँव में घाव हो जाता है और वह अक्सर लंगड़ा हो जाता है या वह टिटनस जैसी किसी बीमारी का शिकार हो जाता है।

पशु शल्य चिकित्सक वाईके सिंह से इस बारे में बात करने पर उन्होंने कहा कि पथरीले इलाकों में रहने वाले घोड़ों की नाल तीन से चार सप्ताह बाद और रेतीले भाग में है तो और देर से बदली जानी चाहिए। लेकिन बार-बार बेवजह नाल बदलने से घोड़े के पाँव में जख्म होने के बाद यही जख्म घोड़े को लंगड़ा कर देता है।

पशु चिकित्सक हंसराज गुप्ता ने कहा कि घोड़े की बार-बार नाल हटाने और लगाने के दौरान कीले ठोंकने से खुर में घाव हो जाता है और फिर यह नासूर बन जाता है। उन्होंने कहा कि सामान्य घोड़े की नाल घिसने के बाद ही बदलनी चाहिए।

एक अन्य पशु चिकित्सक ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि काले घोड़े की नाल घोड़े की सेहत के लिए नहीं बल्कि घोड़ा मालिक की सेहत के लिए बार-बार बदली जाने लगी है और पशु संगठन सब कुछ देखने के बावजूद मौन हैं।

'पीपुल्स फॉर एनीमल्स' राजस्थान के प्रदेश संयोजक बाबूलाल जाजू ने काले घोड़े की नाल बार-बार हटाने व लगाने में ठोंकी जाने वाली कीलों को स्पष्ट तौर से पशु क्रूरता अधिनियम का उल्ल्घंन बताया और कहा कि संगठन ऐसे काले घोड़े के स्वामियों के खिलाफ शीघ्र आन्दोलन शुरू करेगा, जो मात्र कमाई के लिए काले घोड़े की नाल बार-बार बदलने का काम करते हैं।

उन्होंने राज्य सरकार से बार-बार बेवजह घोड़े की नाल बदलने वाले घोड़ा मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। जयपुर में काले घोडे़ की नाल से बनी अंगूठी और अन्य वस्तुओं का धंधा करने वाले एक व्यापारी से जब पूछा गया कि एक दिन में वह ऐसी कितनी अँगूठियाँ या अन्य सामान बेच लेते हैं तो उन्होंने कहा कि यह संख्या काफी अधिक है और शनिवार को तो खासतौर पर उनका कारोबार बढ़ जाता है।

जयपुर में काले घोड़े की नाल से बनी वस्तुओं का धंधा इन दिनों जोरों पर है और हर स्थान पर ऐसी वस्तुओं का कारोबार करते लोग देखे जा सकते हैं।

जयपुर के एक शनिदेव मन्दिर के पुजारी ओमप्रकाश के अनुसार रोजाना करीबन चार से पाँच लोग शनि से बचने के लिए सलाह लेने आते हैं, लेकिन शनिवार को यह संख्या सौ पार कर जाती है। इनमें से अधिकतर तीस से चालीस साल वर्ग के है। उन्होंने कहा कि शनि के प्रकोप से काले घोड़े के नाल की अँगूठी पहनने की सलाह तो सदियों से दी जा रही है। यह कोई नई बात नहीं है।
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