उत्तरप्रदेश में दलित वोट बैंक के लिए सत्तारूढ़ बसपा और कांग्रेस के बीच जारी प्रतिस्पर्द्धा के बीच कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने पूर्व बसपा नेताओं पर डोरे डालना शुरू कर दिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल ने बसपा के 42 पूर्व दलित नेताओं को चिह्नित कर उनसे संपर्क साधा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक इनमें से अधिकांश नेता बसपा संस्थापक कांशीराम द्वारा शुरू किए गए मिशन से जुड़े थे, लेकिन अब मायावती ने उन्हें उपेक्षित कर दिया है। कानपुर में हाल में हुए कांग्रेस के राज्य स्तरीय अधिवेशन में राहुल ने कहा था कि बसपा के दलित नेता महसूस कर रहे हैं कि मायावती कांशीराम द्वारा दिखाई गई राह पर नहीं चल रही हैं। इसी कारण वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रदेश में बसपा की नींव डालने वाले नेताओं में से एक कांग्रेस के दलित नेता राजबहादुर ने बताया कांशीराम से जुड़े ज्यादातर नेता कांग्रेस के साथ काम करने के इच्छुक हैं। उन्होंने बताया मायावती द्वारा उपेक्षित ऐसे कई दलित नेताओं से बातचीत जारी है। राज्य में दलितों की समस्याओं की हकीकत जानने के लिए राहुल खुद इन नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। 1991 के चुनाव में इटावा में कांशीराम के चुनाव प्रभारी बसपा के पूर्व नेता मोहरसिंह ने भी माना कि कांग्रेस ने राज्य में दलित आंदोलन की अगुआई करने के लिए उनसे संपर्क साधा है। मोहरसिंह कुछ समय पहले तक समाजवादी पार्टी से जुड़े थे।
वर्ष 1993-95 के दौरान राज्य में सपा-बसपा गठबंधन सरकार में मंत्री रहे राजबहादुर के अनुसार कांग्रेस ही दलितों का दुःख दूर कर सकती है। उन्होंने कहा कि मायावती तो कांशीराम द्वारा लगाए वृक्ष के फल खा रही हैं।
बसपा के पूर्व विधायक और 1995 में मायावती के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके विशेष कार्याधिकारी रहे सुरेशचंद्र गौतम का कहना है कि बसपा के कई दलित नेता अब कांग्रेस में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं।
गौतम ने कहा कि कांशीराम के निधन के बाद से मायावती उनसे जुड़े नेताओं को बाहर का दरवाजा दिखा रही हैं। कांग्रेस इन लोगों को खुशी से अपने खेमे में ले लेगी। बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा बाराबंकी जिला इकाई के संयोजक रह चुके गौतम के अनुसार दलितों को बसपा का बंधुआ वोट बैंक माना जा रहा है, जबकि उनकी बेहतरी के लिए पार्टी कोई काम नहीं कर रही है।
कांग्रेस के संपर्क में आए बसपा के पूर्व नेताओं में पूर्व सांसद रेखा चुग, पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर व मसूद अहमद शामिल बताए जाते हैं।
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