असम के चिड़ियाघर में हाथियों के लिए अब अत्याधुनिक बाड़ा बनाया जा रहा है, जहाँ वे बिना जंजीरों के प्राकृतिक वातावरण में पूरी आजादी के साथ घूम फिर सकेंगे।
चिड़ियाघर के निदेशक नारायण महंत ने बताया कि वैज्ञानिक विधि पर आधारित यह प्रस्तावित बाड़ा न केवल हाथियों के उचित प्रबंधन में मदद करेगा, बल्कि इससे पर्यटक भी जानवरों को बेहद करीब से देख सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इसका मकसद यह है कि जानवरों को प्राकृतिक माहौल मिलेगा और बाड़े के अंदर उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जा सकेगा। महंत ने बताया कि पहले हाथियों को चिड़ियाघर में जंजीरों में बाँधकर रखा जाता था, जिससे उन्हें तनाव के साथ ही मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुँचता था।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों का मकसद जानवरों को प्राकृतिक आवास का अहसास कराना है जैसा कि सुनहरे लंगूर तथा हिमालयी काले भालू के मामलों में पहले ही किया जा चुका है। चिड़ियाघर के बाड़ों में पहले इस प्रकार की घटनाएँ हो चुकी हैं, जहाँ तनाव और स्थान के अभाव के चलते काले भालुओं के शिशुओं ने दम तोड़ दिया।
महंत ने बताया लेकिन अब इन जानवरों के बाड़ों में खुली जगह तथा प्राकृतिक वातावरण ने काले भालुओं के बीच मेलजोल को बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर प्रशासन निजी कंपनियों की मदद से बाड़े बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा चिड़ियाघर के बाड़ों में सुधार तथा परिसर को नया स्वरूप प्रदान करने में निजी कंपनियों ने निवेश की दृष्टि से रूचि दिखाई है। इन प्रस्तावित वैज्ञानिक बाड़ों में हाथियों के नहाने पैरों की देखभाल भोजन तथा चिकित्सा आदि का भी ध्यान रखा जाएगा।
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