विख्यात तबला वादक पंडित किशन महाराज का बीती मध्यरात निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार पिछले छह दिन से जिन्दगी और मौत से संघर्ष कर रहे तबला सम्राट पद्म विभूषण पंडित किशन महाराज ने बीती रात एक निजी नर्सिंग होम में अंतिम साँस ली।
गत मंगलवार को पक्षाघात के बाद उन्हें नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया था। उन्हें पक्षाघात की शिकायत उस समय हुई जब जाने-माने सरोद वादक अमजद अली खाँ अपने परिवार के साथ उनसे मिलने उनके कबीरचौरा स्थित घर पर आए थे।
वे 85 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी श्रीमती बीना, पुत्र पंडित पूरन महाराज, तीन पुत्रियाँ और नाती-पोते हैं। उनके पार्थिव शरीर को आम जनता के दर्शनार्थ यहाँ कबीरचौरा स्थित निवास पर रख गया है।
उनके अंतिम दर्शन के लिए बडी संख्या में कलाकारों, समाजसेवियों और संगीतकारों के अलावा आम लोगों का आना जारी है। उनका अंतिम संस्कार आज शाम पाँच बजे मणिकर्णिका घाट पर होगा।
देश के जाने-माने संगीतकारों अमजद अली खाँ, सितारादेवी, गिरिजादेवी, राजन-साजन मिश्रा, सोमा घोष और शुभा मुद्गल ने पंडित किशन महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
कबीरचौरा में पंडित हरि महाराज के घर वर्ष 1923 में कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण उनका नाम किशन पड़ा। उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में अपने पिता से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। पिता के देहांत के बाद उनके चाचा पंडित बलदेव सहाय के शिष्य कंठे महाराज ने उनकी शिक्षा का कार्यभार संभाला।
किशन महाराज को वर्ष 2002 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष 1973 में पद्मश्री वर्ष 1984 में केन्द्रीय संगीत नाटक पुरस्कार, वर्ष 1986 में उस्ताद इनायत अली खान पुरस्कार, दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार और ताल विलास के अलावा उत्तरप्रदेश रत्न, उत्तरप्रदेश गौरव भोजपुरी रत्न, भागीरथ सम्मान और लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से भी नवाजा गया।
उन्होंने एडिनबर्ग और वर्ष 1965 में कॉमनवेल्थ कला समारोह के साथ ही कई अवसरों पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर प्रतिष्ठा अर्जित की। अपने 85 वर्षो के जीवन में उन्होंने देश के जाने-माने संगीतकारों उस्ताद फैयाद खाँ, पंडित भीमसेन जोशी, पंडित रविशंकर, वसंत राव और उस्ताद अकबर अली खाँ के साथ जुगलबंदी की।
किशन महाराज के शिष्यों में जाने-माने तबला वादक पंडित कुमार बोस, पंडित बालकृष्ण अय्यर, संदीप दास और सुखविंदरसिंह नामधारी आदि शामिल हैं।
बनारस के तबला घराने को विश्व पटल पर मुकाम दिलाने वाले पंडितजी की भारतरत्न पाने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। पिछले दिनों एक साक्षात्कार में स्वर्गीय किशन महाराज ने कहा था कि भारतरत्न को छोड़कर अब कोई सम्मान स्वीकार नहीं। उनके इस बयान पर काफी प्रतिक्रिया भी हुई थी।
यह एक संयोग ही है कि जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्मे किशन महाराज अर्द्धरात्रि को ही दुनिया से गए। अपने प्रारंभिक दौर में पंडितजी रियाज भी रात्रि बारह बजे से शुरू करते थे।
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