(प्रियंका पांडेय व नवीन रांगियाल) 3 मई यानी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस, हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के एक सशक्त माध्यम का दिन। इस दिन का महत्व जितना अधिक मीडिया के लिए है, उतना ही अधिक समाज व आम आदमी के लिए भी है। वर्तमान में मीडिया की स्थिति, इसका भविष्य व इसकी चुनौतियाँ कुछ ऐसे पहलू हैं, जो आज के दिन हमें इस विषय पर सोचने पर मजबूर करते हैं।
टीवी व प्रिंट पत्रकारिता जगत की जानी-मानी पत्रकार सुश्री अलका सक्सेना के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश...
प्रश्न - प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक, दोनों प्रकार के मीडिया का आपको लंबा अनुभव है। ऐसे में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व वेब मीडिया के बढ़ते हुए स्वरूप में आपको क्या फर्क लगता है? उत्तर - मूल रूप से ये तीनों माध्यम खबरों के ही माध्यम हैं। सभी में सबसे बड़ी समानता है कि तीनों ही सूचना प्रदान करते हैं। अखबार को आप कभी भी और कहीं भी देख सकते हैं, लेकिन टीवी में आपके पास अधिक विकल्प नहीं हैं। यहाँ पर जो भी चैनल पर आ रहा है, उसे आप उसी समय देख सकते हैं। टीवी विजुअल्स का माध्यम है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह कम समय में विजुअल्स के साथ आपको जानकारी दे सकता है। इंटरनेट पर आपके पास आज विकल्प ही विकल्प हैं। आप जो चाहें, जितना चाहें देख सकते हैं। वहीं आज के दौर में मोबाइल मीडिया के बढ़ते प्रसार को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है कि यह भविष्य का सबसे व्यापक मीडिया सिद्ध होगा।
प्रश्न - आज आप मीडिया जगत की सफल पत्रकारों में से एक हैं, एक महिला के रूप में आप मीडिया जगत में क्या चुनौतियाँ पाती हैं? उत्तर - यदि टीवी की बात करें तो यह क्षेत्र महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक बायस है। चूँकि यह एक विजुअल माध्यम है इसलिए महिलाओं के पास अधिक विकल्प हैं, मगर यह दीर्घकालिक नहीं है। इस क्षेत्र में लंबी पारी खेलने के लिए सच्ची प्रतिभा व कड़ी मेहनत का होना अधिक आवश्यक है। जहाँ बात किसी महिला के परिवार व करियर की आती है तो भारतीय महिला के संस्कार ही ऐसे हैं कि वह परिवार व करियर को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित कर लेती है। मैं खुद एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ, पर विवाह के इतने सालों बाद भी मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हुई हूँ।
प्रश्न - ब्रॉडकास्ट मीडिया के बदलते हुए व्यवसायिक स्वरूप के विषय में आप क्या कहेंगी? उत्तर - मैं मानती हूँ कि मीडिया आज बहुत अधिक व्यावसायिक हो चुका है। यदि आपको खबर देखनी है तो अँगरेजी चैनल पर जाइए, वरना तमाशा देखने के लिए हिन्दी चैनल तो हैं ही। हालाँकि अँगरेजी चैनल एक वर्ग विशेष के लिए हैं और उनमें प्रतियोगिता सीमित है, इसलिए उनमें टीआरपी की दौड़ कम है। आम आदमी हिन्दी चैनल ही अधिक देखता है। टीआरपी के चलते आज खबरों का स्तर गिरा जरूर है पर यह लंबे समय तक नहीं है। वैसे भी आज ऐसा कौन सा क्षेत्र नहीं है, जो व्यावसायिक न हो।
प्रश्न - भारत में दिनोंदिन विस्तारित होते ऑनलाइन मीडिया को आप कहाँ देखती हैं? उत्तर - वेब मीडिया का भविष्य बहुत ही सुनहरा है। आज की पीढ़ी कम्प्यूटर से काफी खुली हुई है। अब मेरे बेटे को ही ले लीजिए, वह इंटरनेट के बारे में जितना जानता है, मैं सोच भी नहीं सकती। यह एक स्वतंत्र मीडिया है, जिसका भविष्य बेहद सुनहरा है।
प्रश्न - वर्तमान में वेब मीडिया के बढ़ते चलन के साथ-साथ ब्लॉग का भी विकासशील स्वरूप दिख रहा है। आप विचारों की अभिव्यक्ति के इस माध्यम को कितना सशक्त मानती हैं? उत्तर - हर किसी को अपनी बात कहने का हक है। यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति पत्रकार या लेखक हो, मगर उसके विचारों की अभिव्यक्ति के लिए ब्लॉग लिखना एक सशक्त जरिया है। इसे प्रोत्साहन मिलना चाहिए। बचपन में मैं समाचार-पत्रों में संपादक के नाम चिट्ठियाँ लिखा करती थी। वह भी अभिव्यक्ति का एक जरिया था। आज हमारे पास विकल्प बढ़ गए हैं, ब्लॉग भी इसी का एक उदाहरण है।
प्रश्न- मीडिया में विदेशी निवेश के मसले पर आप क्या सोचती हैं? उत्तर - जरूर होना चाहिए। मुझे नहीं लगता है कि मीडिया में विदेशी कंपनियों के 49 प्रतिशत निवेश में सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति होनी चाहिए। हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है। आखिर 51 प्रतिशत अधिकार तो भारत सरकार के ही होंगे। हमारी संस्कृति इतनी नाजुक नहीं है कि विदेशी निवेश से इसे कोई नुकसान पहुँचे। इससे हमारे पास विकल्प के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार होगा। वैसे भी देश के गंभीर मसलों के प्रसारण पर तो भारत सरकार का नियंत्रण ही होगा।
प्रश्न- पत्रकारिता जगत में अपना भविष्य देखने वाले युवा वर्ग को आप क्या संदेश देना चाहेंगी? उत्तर - पत्रकारिता जगत में दाखिल होने वाले हर युवक व युवती को मैं यही कहना चाहूँगी कि पत्रकारिता मात्र ग्लैमर नहीं है। इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले वह यदि ग्लैमर, पैसा या किसी मजबूत स्थिति के विषय में सोच रहा है, तो वह कभी भी सच्चा पत्रकार सिद्ध नहीं हो सकता। युवतियों के लिए यह अवश्य कहूँगी कि पत्रकारिता में शॉर्टकट के रास्ते से कुछ भी हासिल नहीं होता है। मीडिया में लंबे समय तक रहना है तो आप में अपने काम के प्रति लगन व समर्पण बेहद आवश्यक है।
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