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...और धर्मेन्द्र ऑटो में कूद पड़े
'देसी ही-मैन' धर्मेन्द्र राजधानी के पाँच सितारा होटल ली मैरेडियन में एक देशी घी ब्रांड की पुरजोर वकालत करने के बाद घर लौटते हुए महँगी कार को धता बताकर देसी सवारी ऑटो में बैठकर चलते बने। उनकी इस नई अदा पर उन्हें घेरे तमाम मीडियाकर्मी हक्के-बक्के रह गए।

होटल से चहलकदमी करते हुए वे बाहर सड़क पर आए। उनकी एक बाइट लेने के लिए मीडियाकर्मी उनके पीछे दौड़ लगाने गए। बिंदास धर्मेन्द्र ने सामने से आते ऑटो को हाथ दिया और ऑटो रुकने पर उसमें बैठने लगे। मीडियाकर्मियों ने उनसे इल्तजा की कि जाते-जाते कुछ तो कह दीजिए।

काफी मूड में नजर आ रहे धर्मेन्द्र ने फिल्म 'शोले' में पानी की टंकी पर चढ़कर बोले गए अपने सदाबहार डायलॉग कूद जाऊँगा -फाँद जाऊँगा.. दोहराया और यह कहते हुए वे सचमुच ऑटो में बैठकर चलते बने।

इससे पहले होटल में एक देशी घी ब्रांड को लांच करते हुए उन्होंने इसे अमृत बताया और कहा ि मैं जाट किसान परिवार में पैदा हुआ हूँ और बचपन से ही दूघ-घी का जमकर सेवन किया है। उन्होंने कहा कि अगर सेहत ठीक रही तो दिमाग और दिल भी अच्छा रहेगा।
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