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संकटमोचन मंदिर में सुरों की गंगा बही
भारतीय शास्त्रीय गायन की पहचान पंडित जसराज ने तुलसी दास द्वारा स्थापित ऐतिहासिक संकटमोचन मंदिर में सुरों की गंगा बहाई, जिसमें संगीत साधक बहते ही चले गए।

मौका था पाँच दिवसीय संकटमोचन संगीत समारोह के समापन का और इसमें सारी रात जगे श्रोताओं को जब मंगलवार की उषाकाल में अंतिम प्रस्तुति के तौर पर पंडित जसराज ने भारतीय शास्त्रीय गायन का हनुमान भक्तों को रसपान कराया तो श्रोता मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके।

पंडित जसराज ने गायन के बाद बताया कि हनुमानजी के चरणों में गायन का आध्यात्मिक महत्व है और इससे उन्हें हार्दिक शांति एवं प्रसन्नता प्राप्त होती है। जसराज के शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय गायन पर श्रोता रसपान कर झूमते रहे।

जसराज ने जब मंदिर में राग बैरागी भैरव के स्वरों की तान लगाई तो आसमान पर सूरज देव ने अपनी लालिमा बिखेर दी। उन्होंने इस राग में एक ताल एवं तीन ताल की बंदिशें तथा बाद में भजन पेश कर लोगों का मन मोह लिया।

पाँच दिवसीय संकटमोचन संगीत समारोह में मध्य रात्रि में सरोद वादक अमजद अली खाँ के बेटे अमान एवं अयान अली ने जब सरोद पर तान छेड़ी तो श्रोता दंग रह गए। लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि वह दोनों युवा कलाकारों को नमन करें अथवा उनके यशस्वी पिता को।

दोनों युवा कलाकारों ने विभिन्न रागों पर इतनी खूबसूरती से सरोद वादन किया कि वहाँ उपस्थित दर्शकों ने दातों तले अंगुली दबा ली। अमान और अयान के बाद संतूर पर विश्व प्रसिध्द संतूरवादक भजन सोपोरी ने जब सुरों की नदी बहाई तो लगा कि जैसे एक बारगी संकटमोचन मंदिर परिसर में कश्मीर की वादियाँ स्वयं अवतरित हो गई हैं।
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