मलकानगिरी और गजपति जैसे दक्षिणी जिलों में अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए माओवादियों द्वारा बच्चों और खासतौर से पढ़ाई छोड़ चुके किशोरों को अपने खेमे में शामिल किए जाने की रिपोर्टो के बीच उड़ीसा सरकार ने आज कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए वह सीआरपीएफ जैसे अद्धसैनिक बलों की मदद लेगी।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि बच्चों को माओवादियों के हाथों में पड़ने से रोकने के लिए हम अर्द्धसैनिक बलों तथा स्थानीय पुलिस के जरिए पहल करेंगे। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) ने इस इलाके में अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए गरीब बच्चों खासतौर से स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले किशोरों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
मलकानगिरी के जिला पुलिस अधीक्षक एसके गजभैय्ये ने बताया माओवादियों ने एक बाल संगठन बनाया है। उन्होंने बताया कि माओवादियों ने पहले से ही मौजूद लड़कों की तीन ब्रिगेडों में दलार नामक एक और ब्रिगेड का इजाफा किया है।
उन्होंने अब एक नई दलाम मचकुंड का गठन किया है जो बोंदाघाटी, बालीमेला, लामतपुट तथा अंकादेल में काम करेगी। सूत्रों ने बताया कि उड़ीसा के 30 जिलों में से 14 में माओवादियों की मौजूदगी है लेकिन उन्होंने केवल दो जिलों मलकानगिरी तथा गजपति में बाल संगठित किए हैं।
मलकानगिरी का बाल संगठन कुछ समय से सक्रिय है जबकि गजपति का ऐसा ही संगठन अभी आरंभिक प्रक्रिया में है। उत्तरी मध्य पुलिस रेंज के देवगढ़ संबलपुर ढेनकनाल तथा अंगुल जिलों से हालाँकि केवल सात बच्चे भाकपा (एमएल) जनशकरी में शामिल हुए हैं।
तीन बच्चों ने हाल ही में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था जबकि तीन अन्य पहले ही संगठन छोड़कर जा चुके हैं। डीआईजी अरूण सारंगी ने बताया उत्तर मध्य जोन में केवल एक बच्चा माओवादी कैडर में हो सकता है।
माओवादी विरोधी अभियान में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सूचनाएँ एकत्र करने के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने की यह माओवादियों की रणनीति का हिस्सा है।
एक अधिकारी ने बताया चूँकि बच्चों पर कोई संदेह नहीं करता है, इसलिए वे शहरी इलाकों में कबाड़ी या सड़क किनारे खोमचे लगाने वाले का भेष बनाकर सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही पर सूचनाएँ एकत्र करते हैं। उन्होंने साथ ही बताया कि माओवादी नेता पत्र तथा अन्य सूचनाएँ एकत्र करने के लिए भी बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।
माओवादी बच्चों द्वारा हाल ही में समर्पण किए जाने के बाद माओवादियों के कामकाज के तौर तरीकों का पता चला। डीआईजी सारंगी ने बताया इन दोनों किशोरों को प्रतिमाह तीन हजार रुपए देने का आश्वासन दिया गया था।
बाल अधिकार कार्यकर्ता हालाँकि इस स्थिति के लिए सरकार को कसूरवार ठहराते हैं। उनका कहना है कि सरकार आदिवासी बहुल जिलों में बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने में विफल रही है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता महेन्द्र परिड़ा कहते हैं कि मलकानगिरी में करीब 90 फीसदी बच्चे स्कूलों से बाहर हैं और इससे उनके माओवादियों के शिकंजे में पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मलकानगिरी जैसे पिछड़े जिलों में बाल कल्याण समितियों का गठन करने में विफल रही है।
भाकपा (एमएल) लिबरेशन के प्रदेश सचिव क्षितिज बिस्वाल कहते हैं कि बच्चों को माओवादियों में शामिल होने से रोकने के लिए सीआरपीएफ और सुरक्षा बलों की मदद लेना गलत है। वह कहते हैं केवल शिक्षा से ही बच्चों को माओवादियों से दूर रखा जा सकता है। वह माओवाद प्रभावित जिलों में अधिक व्यावसायिक स्कूलों की स्थापना की माँग कर रहे हैं।
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