बच्चे के जन्म और शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौकों पर नजराना वसूल कर अपना जीवन-यापन करने वाले तथा कुछ वषों से राजनीति के मैदान में दस्तक दे चुके बिहार के किन्नरों की अब इच्छा है कि मध्यकालीन युग के शासकों की तरह सरकार पहरेदारों और सुरक्षा गार्डों के तौर पर उनकी सेवा ले।
समाज कल्याण विभाग द्वारा गत 22 अप्रैल को राज्य के किन्नरों के विकास को लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न भागों से आए किन्नरों ने अपनी यह इच्छा सम्मेलन में उनके विचार सुनने पहुँचे समाज कल्याण मंत्री के समक्ष रखी।
बिहार में किन्नरों के नेता काली हिजड़ा और ललन हिजड़ा ने जो स्वयं भी इस कार्यशाला में शामिल थे सरकार की इस पहल की सराहना की और राज्य में शांति कायम रहे तथा प्रदेश का विकास हो उसके लिए दुआएँ दीं।
काली हिजड़ा ने पटना लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1995 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। बाद में वे वर्ष 2001 के नगर निकाय चुनाव में वार्ड नंबर दस से चुनाव लड़ा और विजय भी हासिल की। ऐसा ही एक किन्नर गया जिले का सुरेश हिजड़ा है जिसने वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में गया नगर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
इस कार्यशाला में भाग लेने आए किन्नर समुदाय सहित कई अन्य स्वयंसेवी संगठनों समाज कल्याण विभाग के मंत्री और अधिकारियों के बीच किन्नरों के कल्याण संबंधी विषयों पर चर्चा हुई। पहले के राजा-महाराजाओं की तरह फिर से किन्नरों की सेवा पहरेदारों या सुरक्षा गार्ड के तौर पर उन स्थानों पर लेने पर कार्यशाला में चर्चा हुई जहाँ महिलाएँ काम करती हैं या रहती हैं। खासतौर से महिला सुधार गृह या महिला कॉलेज और अस्पतालों आदि में।
किन्नरों की अन्य माँगों में उन्हें रेल किराए में रियायत देने, देश में किन्नरों की आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति का सर्वेक्षण किए जाने, देश की जनगणना में अन्य समुदाय के साथ उनके समुदाय को भी शुमार किए जाने और उनके लिए निगम चुनावों से लेकर संसद तक की सीट आरक्षित कर राजनीतिक भागीदारी दिए जाना शामिल है।
कार्यशाला में उनका नाम बीपीएल सूची में शामिल किए जाने, आवास की सुविधा उपलब्ध कराने, राशन कार्ड और पहचान पत्र मुहैया कराने, वृद्धावस्था पेशन दिए जाने, कला, संस्कृति विभाग से तमाम जिला एवं प्रखंड स्तर के कार्यालयों में किन्नर कलाकारों की नियुक्ति इस समुदाय के लोगों को व्यस्क शिक्षा कार्यक्रम के तहत शिक्षित किए जाने की भी माँग की गई।
कार्यशाला में भाग लेने तमिलनाडु से आई किन्नर समुदाय से जुड़ी आशा भारतीय ने बताया कि यह दक्षिणी राज्य देश का ऐसा पहला प्रदेश है जहाँ की सरकार द्वारा किन्नरों को प्रदेश में यथोचित स्थान प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु राज्य में किन्नरों को बीपीएल सूची में शामिल किया गया है और उनके राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।
भारती ने बताया कि तमिलनाडु में किन्नरों के विकास के लिए सरकार द्वारा एक बोर्ड का भी गठन किया गया है। इसी समुदाय से जुड़ी उड़ीसा की मित्ताली मोहंती ने कहा कि किन्नरों को उत्पादन कार्यों में लगाया जा सकता है।
समाज कल्याण विभाग के मंत्री दामोदर राउत ने बताया कि इस समुदाय के लोगों को गली-कुचों में घूम-घूमकर अपने जीविकोपार्जन के लिए नजराना माँगने से छुटकारा दिलाने के लिए उनके विभाग ने योजना बनाई है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा गार्डों के अतिरिक्त इस समुदाय के लोगों की सेवा स्वास्थ्य के क्षेत्र में, गाँव-गाँव खासतौर से महिलाओं के लिए जागरुकता पैदा करने के उददेश्य से ली जा सकती है।
किन्नर जिन्हें हम प्रचलित भाषा में हिजड़ा नाम से भी संबोधित करते आ रहे हैं, इतिहास के पन्नों को अगर उलटकर देखें तो जो पाचीनकाल से ही वे हमारे समाज का एक अंग हैं और इनका जिक्र महाभारत के शिखंडी से लेकर मध्यकालीन शासकों के हरम में बतौर पहरेदार के तौर पर मिलता है। पटना विश्वविद्यालय में इतिहास विषय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र गोपाल बताते हैं कि मुगल शासकों सहित कई अन्य मध्यकालीन शासकों ने किन्नरों को न सिर्फ अपने हरम की पहरेदारी का जिम्मा सौंप रखा था बल्कि उनमें से बहुतेरे तो राजदरबारी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ कई बादशाहों के खास सिपहसालार भी हुए।
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