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लखनऊ चिड़ियाघर में जानवरों की मौज...
खस की चटाई में साँप और चिम्पांजी के लिए ज्यूस
अरविन्द शुक्ला
राज्य में पारे का तापमान जहाँ 43 डिग्री सेलसियस पहुँच गया हो, वहां गर्मी से निपटने के लिए हर किसी ने इंतजाम कर लिए है। लखनऊ चिड़ियाघर के बेजुबान वन्यजीवों को भी गर्म हवाओं से बचाने की तैयारी की गई गई है। वन्य जीवों की पसंद के अनुसार फल, जूस व अन्य आहार बदल-बदल कर देने की तैयारी की गई है।

मैसूर के वातावरण में रहकर यहां चिड़ियाघर लाए गए चिम्पांजी जोड़ा पर विशेष नजर रखी जा रही है। यहाँ के बढ़ते तापमान से उस पर कोई प्रभाव न पड़े, इसके लिए उन्हें हर रोज एक-एक किलो मोसम्बी का ज्यूस निकालकर दिया जा रहा है। ज्यूस निकालने के लिए चिड़ियाघर में मशीन खरीदकर लाई गई है। इसके अलावा उनके बाड़े में खस की चटाई भी लगाई गई है। बाड़े में पानी का छिड़काव भी लगातार किया जा रहा है।

अधिक ठंड व अधिक गर्म के मौसम में परेशान सा हो जाने वाले साँपों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। उनके बाड़े में कूलर लगाए गए हैं, जिससे वे गर्मी में भी ठंड का अहसास कर सकें।

हुक्कू शेर के बाड़े मे खस की चटाई की एक झोपड़ी भी बनाई गई है। इस झोपड़ी के ऊपरी हिस्से में पाइप लगाया गया है। इस पाइप में जगह-जगह छेद किए गए हैं, जहाँ पानी गिरकर चटाई पर आता है। और झोपड़ी दिनभर ठंडी रहती है। इस कारण दोपहर के वक्त हुक्कू जोड़े के कम ही दर्शन हो पा रहे है। इनके बाडे मे भी दिन में कई बार पानी का छिड़काव कराया जाता है।

भालू के खाने में शहद शामिल दिया जा रहा है। हाथियों को मक्के की रोटी के साथ गन्ने व गुड़ की मात्रा बढ़ा दी गई है। पहाड़ी इलाके मे रहने वाले फीजेन्ट को भी गर्मी से राहत देने के लिए उनके पिंजरे में चटाईयाँ लगाई गई हैं, जहाँ दिन में कई बार पानी का छिड़काव किया जाता है।

हिरन समेत अन्य वन्य जीवों के बाड़े में भी पानी के छिड़काव की विशेष व्यवस्था की गई है, जहाँ वन्यजीव ठंड का आनंद लेते दिखते है। चिड़ियाघर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला कहते है कि आम आने के बाद बंदरों को केरी का पना भी दिया जाएगा। इससे आलावा शेर व बाघ के बाड़ों में पानी भरवा दिया गया है। सभी वन्यजीव को मिनरल वाटर भी दिया जा रहा है।

निदेशक रेनूसिंह ने बताया कि तेंदुआ, शेर व अन्य माँसाहार वन्य जीवों के खाने में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है, अन्य वन्य जीवों के खाने में मौसम के आधार पर फलों को शामिल किया जा रहा है, ताकि उनमें ताजगी बनी रहे। दुर्लभ पक्षियों को गर्मी से बचाने के लिए डक पाण्ड के पानी ताजा बना रहे इसके लिए व्यापक इंतजाम किया जा रहा है।

चिड़ियाघर में पिछले दिनों बरेली के आईवीआरआई के डॉक्टरों की टीम ने वन्यजीवों के आहार व्यवहार का निरीक्षण किया। रेनूसिंह ने बताया कि वन्य जीवों के स्वास्थ्य की जाँच करने के लिए आईवीआरआई की टीम बुलाई जाती है।

संसाधनों का टोटा : चिड़ियाघर के वन्य जीवों के संरक्षण का जिम्मा सभाँलने वाला वन विभाग चिड़ियाघर चिकित्सालय में संसाधन की कमी को पूरा नहीं कर पा रहा है। इससे वन्य की जाँच समय पर नहीं हो पा रही है और वन्य जीव बीमार होकर आकाल मौत का शिकार हो रहे हैं।

चिड़ियाघर में पिछले दिनों अचानक भालू मंगरू की मौत हो गई। यह भालू ट्यूबरकोलिसिस बीमारी से पीड़ित था। डाक्टर इसका इलाज लम्बे समय से कर रहे थे। डाक्टरों के अनुसार दवा से ये भालू ठीक हो गया था, लेकिन मार्च माह में दोबारा बीमार हो गया था। चिड़ियाघर चिकित्सालय में उच्चस्तीय पैथालॉजी की व्यवस्था होती। जाँच करके दोबारा इलाज शुरू किया जा सकता था।

चिड़ियाघर के चिकित्सालय को उच्चस्तरीय करनके लिए लम्बे अर्से से कवायद चल रही है, लेकिन अभी तक सभी प्रस्ताव फाइलों में कैद हैं। वन्य जीवों के विभिन्न जांचों के लिए पैथालॉजी शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए विभिन्न उपकरणों व पैरामेडिकल स्टाफ का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। पोर्टेबल एक्स-रे खरीदने का प्रस्ताव चिम्पैंजी बीमार होने पर होने दिया गया था।

अब तक बीमारियों से अनेक वन्यजीव मर चुके हैं। सफेद शेर (रीमा), की मौत हार्टअटैक से, रॉयल बंगाल टाइगर (कान्हा) की मौत रीढ़ की हड्डी के कैंसर से, सफेद शेर (रूपेश) की मौत जबड़े के कैंसर से, दो भालुओं की मौत ट्यूबरकोलिसिस (टीबी) तथा एक चिम्पैंजी भी ट्यूबरकोलिसिस से मौत के मुँह में जा चुका है।
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