शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौकों पर अपनी एक खास स्टाइल से तालियाँ बजाकर नाच-गाना और नेग वसूली करके जीवनयापन करने वाले किन्नरों ने राजनीति के मैदान में तो दस्तक कब की दे दी है, अब उनमे बाहुबली राजनेताओं की तरह हथियार रखने का शौक भी पैदा हो गया है और इसमे पहल की है उत्तरप्रदेश के मऊ जिले की किन्नर संघ की अध्यक्ष श्वेता ने।
40 वर्षीय किन्नर श्वेता स्नातक है और उन्हें मऊ जिला प्रशासन ने इसी वर्ष मार्च महीने मे रिवाल्वर का लाइसेंस जारी किया है और अब वह बाकायदा रिवाल्वर टाँगकर निकलती है।
मऊ के जिलाधिकारी पी. गुरुप्रसाद ने श्वेता को रिवाल्वर का लाइसेंस जारी किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि कानून मे किसी किन्नर को शस्त्र लाइसेंस देने पर कोई रोक नही है, इसलिए आवेदन मिलने पर आवश्यक कार्यवाही के बाद श्वेता किन्नर को लाइसेंस जारी कर दिया गया।
किन्नर श्वेता ने बताया कि रिवाल्वर मेरे लिए सुरक्षा कारणों से ही जरुरी नहीं है, बल्कि इसलिए भी जरुरी है कि अब यह एक स्टेटस सिंबल है। अधिकांश राजनेताओं के रिवाल्वर के लाइसेंस हैं, इसलिए मैंने भी इसे लेना जरुरी समझा। श्वेता ने बताया कि वे बसपा की सक्रिय कार्यकर्ता हैं और राजनीति में बड़ी भूमिका निभाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 मे वे बलिया से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चन्द्रशेखर जैसे दिग्गज नेता के मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार के रुप मे चुनाव लड़ चुकी हैं, जिसमे उन्हें 27 हजार वोट मिले थे।
अक्सर बसपा के झंडे के रंग की नीली साड़ी पहनने वाली श्वेता ने कहा कि वे न सिर्फ बसपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहती हैं, बल्कि बसपा का 'स्टार प्रचारक' बनाना चाहती हैं।
श्वेता ने दावा किया कि उन्होंने बसपा अध्यक्ष एवं प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को इस संबंध मे पत्र भी लिखा है और उनके निर्देश पर प्रदेश की किसी भी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।
बसपा के प्रति लगाव का कारण पूछने पर श्वेता ने बताया कि समाज मे किन्नरों की सामाजिक स्थिति दलितों से भी खराब है और वे अपने आपको वंचित और दबे कुचले समाज के करीब पाती हैं, जिनकी लड़ाई बसपा ही लड़ती रही है।
स्टार प्रचारक बनने की अपनी ख्वाहिश के बारे मे उन्होंने कहा कि समाज मे किन्नरों का अपनी तरह का अलग करिश्मा है। हमारे इर्द-गिर्द भीड़ स्वत: एकत्र हो जाती है और पार्टी का झंडा और बैनर पा जाने के बाद यह करिश्मा और बढ़ जाएगा।
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