वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में पृथ्वी पर तापमान बढ़ने तथा वर्षाकाल कम होने से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए पृथ्वी, जल एवं जलवायु की सुरक्षा करनी होगी ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्व पर्यावरण मिल सके।
केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान काजरी एवं मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइसेंस के संयुक्त तत्वावधान में कल पृथ्वी दिवस पर अनेक वैज्ञानिकों ने ऐसी संभावनाएँ व्यक्त कीं।
इस अवसर पर शहर के विभिन्न स्कूलों के छात्रों को काजरी द्वारा जल संग्रहण, पर्यावरण संरक्षण एवं शुष्क क्षेत्र में हरियाली की चादर बिछाने और कृषि की नवीन तकनीकों के बारे में दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से जानकारी दी गई।
जोधपुर रक्षा प्रयोगशाला के निदेशक एनके जैन ने छात्रों को बताया कि पृथ्वी से मानव की सभी आवश्यकताएँ पूरी होती हैं और इसकी सुरक्षा करना मानव जाति की सुरक्षा के समान होती है।
उन्होंने शुद्व वातावरण बनाए रखने के लिए वाहनों की संख्या कम करने एवं अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा पृथ्वी को प्रदूषित होने से बचाने का आह्वान किया।
इस मौके पर काजरी निदेशक डॉ. केपीआर बिठल ने कहा पृथ्वी पर बढ़ता तापमान हमारे लिए चुनौती है और मानव को शुद्ध ऑक्सीजन, जल उपलब्ध कराने के लिए हमें नदी, नालों, समुद्र एवं जमीन को प्रदूषित होने से बचाना होगा। उन्होंने कहा कि धरती पर स्वच्छ जल एवं जलवायु होने से ही विश्व की सुरक्षा एवं समृद्धि हो सकती है।
काजरी के प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमलकर ने कहा कि निकट भविष्य में पृथ्वी पर तापमान बढ़ने एवं ग्लेशियर पिघलने और वर्षाकाल कम होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं नए आविष्कृत यंत्रों के माध्यम से पूर्व सूचना प्राप्त कर मानव को उनसे होने वाली हानि से बचाया जा सकता है।
प्रादेशिक सुदूर संवेदन केन्द्र (इसरो) जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ. विनोद बोथले ने बताया कि सुदूर संवेदन केन्द्र द्वारा पृथ्वी उपग्रह की भूमि, समुद्र, वातावरण के बारे में समय समय पर जानकारी प्राप्त कर हम साइक्लोन, बाढ़ अन्य प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी कर सकते है और ऐसी आपदाओं से बचने के लिए योजनाएँ बना सकते है।
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